सूबे में पॉलिथीन के प्रयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जा चुका है। लगातार छापे भी मारे जा रहे हैं। बावजूद इसके जिले में पॉलिथीन का प्रयोग नहीं रुक रहा है। हद तो तब हो गई जब जिले के एक ब्लाक में आयोजित दो दिवसीय खेलकूद प्रतियोगिता के मौके पर बच्चों को पॉलिथीन की थैली में रखकर भोजन दिया गया। इस मामले में जब खंड शिक्षा अधिकारी प्रवीन शुक्ला से बात की गई तो बजट का रोना रोते हुए कहा कि ऐसे में पन्नी में नहीं तो डिब्बे में भोजन मिलेगा।
सूबे में पॉलिथीन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जा चुका है। सरकार की ओर से इस बात के आदेश जारी किए गए हैं कि यदि कहीं पर पॉलिथीन का प्रयोग होता मिले तो संबंधित से जुर्माना वसूलने के साथ ही उसके खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज कराई जाए।
पॉलिथीन पर प्रतिबंध के बाद शासन ने यह निर्देश जारी किए थे कि इससे होने वाले नुकसान के बारे में आम जनता को जागरूक करने को प्रचार-प्रसार किया जाए। शहर के साथ ही जिले भर में स्कूली बच्चों और अनेक स्वयं सेवी, सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने रैलियों का आयोजन कर लोगों से पॉलिथीन का प्रयोग न करने का आह्वान भी किया। लेकिन यह सब प्रयास तब बेअसर हो जाते हैं, जब सरकारी अफसर ही पॉलिथीन के उपयोग को नजर अंदाज करें।
शुक्रवार को ब्लाक म्याऊं में परिषदीय स्कूलों के बच्चों की दो दिनी खेलकूद प्रतियोगिताएं शुरू हुईं। प्रतियोगिता में ब्लाक के ज्यादातर स्कूलों के बच्चों ने प्रतिभाग किया। यहां पर बच्चों को लो क्वालिटी पॉलिथीन की थैली में रखकर भोजन दिया गया। कुछ लोगों ने इस बारे में वहां पर आपत्ति भी की।
25 रुपये में पन्नी नहीं तो क्या फट्टा (डिब्बा) देगा..
जब खंड शिक्षाधिकारी म्याऊं प्रवीण शुक्ला से बात की गई तो उन्होंने कहा कि शासन की ओर से बच्चों के भोजन को कोई धनराशि नहीं मिलती है। चंदा करके बच्चों को भोजन दिया जा रहा है। जिससे भोजन लिया है वह 25 रुपये में पन्नी नहीं तो क्या फट्टा (डिब्बा) देगा।