एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के छात्र और शिक्षक अब भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिकों और छात्रों के साथ मिलकर रिसर्च प्रोजेक्ट पर कार्य कर सकेंगे। दोनों संस्थानों के बीच बुधवार को पांच साल के लिए समझौता (एमओयू) हो गया।
विश्वविद्यालय उच्च स्तरीय रिसर्च को बढ़ावा देने की ओर कदम बढ़ा रहा है। अब तक विश्वविद्यालय का किसी रिसर्च संस्थान के साथ एमओयू नहीं है। आईवीआरआई के साथ समझौता होने से विश्वविद्यालय के साइंस विभाग और फार्मेसी को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा। यहां के छात्र आईवीआरआई के साथ ज्वाइंट रिसर्च प्रोजेक्ट और ज्वाइंट प्रोग्राम पर कार्य कर सकेंगे। उन्हें वहां की तकनीक, लैब, लाइब्रेरी, एनिमल्स, तकनीक के उपयोग के साथ एक्सर्ट की मदद भी मिल सकेगी।
विश्वविद्यालय के छात्र आईवीआरआई जाकर रिसर्च भी कर सकेंगे। वहीं आईवीआरआई के छात्र और शिक्षक भी विश्वविद्यालय की सुविधाओं का उपयोग कर सकेंगे। कुलपति प्रोफेसर अनिल शुल्क, डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर एके जेटली, कुलसचिव एके अरविंद, वित्त अधिकारी सुरेश उपाध्याय और आईवीआरआई के निदेशक डॉ. आरके सिंह व अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में एमओयू हुआ।
उच्च स्तरीय शोध हो सकेंगे
विश्वविद्यालय में सुविधाओं की कमी नहीं है, बावजूद इसके वहां उच्च स्तरीय शोध नहीं हो पाते। विश्वविद्यालय के नाम से अब तक कोई पेटेंट नहीं है। आईवीआरआई से जुड़ने के बाद विश्वविद्यालय में उच्च स्तरीय शोध को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि आईवीआरआई की पहचान उच्च स्तरीय शोध के लिए है। हालांकि विश्वविद्यालय के बॉटनी विभाग, एनीमल्स साइंस, फार्मेसी, फिजिक्स विभाग में अच्छे शोध हुए हैं। फार्मेसी विभाग के सामने रिसर्च के लिए एनिमल की समस्या रहती है तो अब दूर हो जाएगी।
कुछ अन्य संस्थानों के साथ
भी एमओयू करने की तैयारी
अब विश्वविद्यालय ने अन्य संस्थाओं के साथ भी एमओयू करने के साथ ही अन्य रिसर्च संस्थानों के साथ एमओयू साइन करने की तैयारी की है ताकि विश्वविद्यालय में रिसर्च को बढ़ावा मिल सके। डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर एके जेटली ने बताया कि कुछ संस्थानों के साथ एमओयू करने पर विचार चल रहा है। जल्द ही उनसे भी समझौता हो जाएगा।
वर्जन
विश्वविद्यालय के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। आईवीआरआई के साथ हमने पांच साल का एमओयू किया है। हमारे यहां के छात्र और शिक्षक आईवीआरआई के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर शोध व रिसर्च प्रोजेक्ट तैयार कर सकेंगे। हम उम्मीद करते हैं कि विश्वविद्यालय में अब उच्च स्तरीय रिसर्च होंगे। हम कुछ नई तकनीक भी विकसित करेंगे।
-प्रोफेसर अनिल शुक्ल, कुलपति