एडमिशन प्रक्रिया को लेकर एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में हुई प्राचार्यों की कार्यशाला में बरेली कॉलेज के प्राचार्य भड़क गए। उनकी नाराजगी विश्वविद्यालय के उस फरमान पर थी जिसमें एडमिशन प्रक्रिया में लापरवाही पर प्राचार्यों पर दंडात्मक कार्रवाई की बात कही गई। ओटीपी का समय बीस मिनट रखने, दस जुलाई तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने के फरमान पर भी नाराजगी जताई। कहा कि ओटीपी का समय निर्धारित करने में व्यवहारिक पक्ष नहीं देखा गया। सौ रुपये पंजीकरण शुल्क लेकर मेरिट बनाने की जिम्मेदारी कॉलेजों को दिए जाने पर अन्य कॉलेजों के प्राचार्यों ने भी नाराजगी जताई।
दरअसल विश्वविद्यालय ने पिछले दिनों एडमिशन को लेकर शासन के निर्देशों का हवाला देते हुए कॉलेजों को एक पत्र जारी किया। इसमें कहा कि एडमिशन में चूक होने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। बरेली कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अजय शर्मा के अलावा अन्य प्राचार्यों ने नाराजगी जताई। कहा कि बीस मिनट ओटीपी का समय देने पर यह भी नहीं सोचा गया कि कितने छात्रों के पास अपना मोबाइल होगा। ओटीपी का समय बढ़ाया जाए। प्राचार्यों को दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी तो दे दी पर पिछले साल जो चूक हुई, उस पर विश्वविद्यालय ने क्या कार्रवाई की। बार-बार मेरिट बदली गई। गड़बड़ियां हुई तो उस गलती के लिए किसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई। कुलसचिव अशोक कुमार अरविंद ने प्राचार्य को रोकते हुए कहा कि कार्यशाला इसके लिए नहीं है, तो उनका कहना था फिर प्राचार्यों को क्यों बुलाया गया। ऐसे ही एक और पत्र जारी कर देते। अन्य कॉलेजों के प्रतिनिधियों का भी कहना था कि इन दिनों ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहे हैं। शिक्षक अवकाश पर हैं, ऐसे में एडमिशन दस जुलाई तक कैसे पूरे होंगे। कुलपति प्रोफेसर अनिल शुक्ल ने कहा कि अवकाश को लेकर बात सही है। विश्वविद्यालय प्रशासन इसको लेकर सकारात्मक निर्णय लेगा। इस मौके पर प्रोफेसर एनएन पांडेय, डॉ. एसएस बेदी, प्रोफेसर सुबोध धवन, आलोक सक्सेना, रविंद्र सिंह गौतम, मयंक आदि मौजूद रहे।
कॉलेज करने लगे फर्जीवाड़ा
पिछले साल की तरह कॉलेज फिर फर्जीवाड़ा करने लगे हैं। इंटर कॉलेजों से डाटा लेकर कॉलेज छात्रों के पंजीकरण खुद ही कर रहे हैं। जब छात्र पंजीकरण करने पहुंचे तो पता चला कि उनका पंजीकरण पहले ही हो चुका है। इसकी शिकायत विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंची तो सब चौंक पड़े। एडमिशन को लेकर हुई बैठक में भी यह मुद्दा उठा। विश्वविद्यालय प्रशासन अब इसका समाधान खोजने में जुटा है।
अफवाह, कॉलेजों ने कर लिए एडमिशन
एडमिशन को लेकर कॉलेजों में अफवाह फैला दी गई कि कुछ कॉलेजों ने एडमिशन भी कर लिए। कार्यशाला में कुछ कॉलेजों ने यह मुद्दा भी उठाया। एजेंसी के प्रतिनिधियों ने कहा कि अभी तक एडमिशन का पोर्टल ही नहीं खुला तो एडमिशन कैसे हो सकते हैं। ओटीपी से सीट लॉक होगी उसके बाद एडमिशन कंफर्म होगा।
एडमिशन में होगी डबल सिक्योरिटी
प्रवेश के लिए मोबाइल का दो बार सत्यापन होगा। पहले रजिस्ट्रेशन के बाद मोबाइल पर पासवर्ड पहुंचेगा। यह पासवर्ड छात्र को सुरक्षित रखना होगा। दूसरे चरण में छात्र के मोबाइल पर ओटीपी आएगा। यह ओटीपी बीस मिनट तक वैध होगा। हालांकि इसपर विवाद के बाद यह कोशिश है कि ओटीपी बीस मिनट बाद नहीं इस्तेमाल होता है तो पांच मिनट बाद ऑटोमैटिक रीसेंड हो जाएगा। उसके बाद दिक्कत है तो कोई और रास्ता निकाला जाएगा। इसका समय भी बढ़ाया जा सकता है।