विश्वविद्यालय और महाविद्यालय ने स्वीकृत सीटों से अधिक प्रवेश किए तो जिम्मेदार लोगों को इस बार उनको जेल की हवा खानी पड़ सकती है। इतना ही नहीं प्रवेश में मनमानी करने पर प्राचार्य पर जुर्माना भी लग सकता है। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने शासनादेश की कॉपी के साथ सभी कॉलेजों को प्रवेश नियमावली जारी की है। शासनादेश में स्पष्ट कहा गया है कि निर्धारित तिथि के बाद और स्वीकृत सीटों से अधिक प्रवेश यदि कोई कॉलेज लेता है तो प्राचार्य पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा। एक साल की सजा या जुर्माना या दोनों की सजा मिल सकती है। शासन ने 2005 में आदेश का कड़ाई से पालन करने का आदेश विश्वविद्यालयों को जारी किया था, लेकिन कॉलेजों ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। कॉलेजों को इस बार प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के पंद्रह दिन बाद छात्रों की सूची विश्वविद्यालय को भेजनी होगी और सूची में दर्ज छात्रों को ही परीक्षा में बैठने की अनुमित मिलेगी। कॉलेजों को आगाह करने के लिए इस बार विश्वविद्यालय ने एडमिशन होने से पहले ही प्रवेश नियमावली जारी कर दी है ताकि कॉलेज बहानेबाजी न कर सकें।
कुलपति प्रोफेसर अनिल शुक्ल के अनुसार शासनादेश और प्रवेश नियमावली वेबसाइट पर अपलोड कराने के साथ कॉलेजों को भेज दी है। अगर इस बार कॉलेज शासनादेश आदेश का उल्लंघन करते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस बार शासन से अनुमति के बाद ही मिलेंगी अतिरिक्त सीटें
कॉलेज हर साल बीस फीसदी अतिरिक्त सीटें मानकर प्रवेश करते हैं और बाद में विश्वविद्यालय से स्वीकृति लेते हैं। कई बार विश्वविद्यालय इस पर कॉलेजों को फटकार भी लगा चुका है। कॉलेज सेक्शन में वृद्धि करते हुए बीस फीसदी सीटें बढ़ा लेते हैं। 60 के सेक्शन में 80 प्रवेश लेते हैं। इस बार विश्वविद्यालय ने अतिरिक्त सीटें बिना शासन की अनुमति के बढ़ाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। उधर, विश्वविद्यालय ने इस साल ही कॉलेजों द्वारा सीधे लिए गए एमएससी के सैकड़ों छात्रों के एडमिशन कैंसल कर दिए थे।