चार जोन में बंटेगा शहर का यातायात, जाम से मिलेगी निजात
एसपी ट्रैफिक तैयार करा रहे हैं ऑटो और टेंपो (विक्रम) का रूट प्लान
बदायूं, सेटेलाइट, मिनी बाईपास और डेलापीर चार जोन बनाने की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। यातायात विभाग शहर के प्रमुख मार्गों पर ऑटो और टेंपो (विक्रम) की संख्या नियंत्रित करने के लिए शहर को चार जोन में बांटकर रूट प्लान बनाने में जुटा है। मेट्रो सिटी की तर्ज पर ऑटो और टेंपो अपने निर्धारित रूट पर ही सवारियों को लेकर आ-जा सकेंगे। उन्हें किसी दूसरे रूट पर जाने की अनुमति नहीं होगी। एसएसपी ने एसपी ट्रैफिक को यह व्यवस्था लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी है।
एसपी ट्रैफिक के मुताबिक आरटीओ से सभी परमिट एक रूट के जारी होते हैं। वर्तमान में जंक्शन से सोलह किमी के दायरे का परमिट जारी होता है। इसकी वजह से जंक्शन रूट के सभी चौराहों पर ऑटो की वजह से जाम लगता है। यूनिक नंबर अलॉट करके रूट प्लान लागू होने के बाद ऑटो की किसी एक मार्ग पर अनावश्यक भीड़ कम हो जाएगी। एसपी ट्रैफिक के मुताबिक बदायूं, सेटेलाइट, मिनी बाईपास और डेलापीर चार जोन बनाए जाने हैं। इसके बाद सभी ऑटो अपने तय रूट पर ही चलेंगे। एसपी ट्रैफिक के मुताबिक शहर में अब सिर्फ पंजीकृत ऑटो ही चल सकेंगे। इस कवायद से करीब तीन हजार बिना पंजीकरण वाले ऑटो कम हो जाने की संभावना है।
टेंपो (विक्रम) भी सिर्फ अपने तय रूट पर ही चलेंगे
शहर में दौड़ रहे करीब 900 टेंपो (विक्रम) का भी रूट प्लान तैयार किया जा रहा है। व्यस्त चौराहों से सवारियों को लेकर चलने वाले टेंपो के रूट तय कर दिए जाएंगे। वह अपने क्षेत्र के अतिरिक्त दूसरे क्षेत्र में नहीं जा सकेंगे। चेकिंग में पकड़े जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान किया जा रहा है।
पंजीकृत ई-रिक्शा होंगे चिह्नित
एसपी ट्रैफिक के मुताबिक नगर निगम के साथ संयुक्त अभियान चलाकर पंजीकृत ई-रिक्शा को चिह्नित किया जा रहा है। वर्तमान में करीब 1539 ई-रिक्शा चल रहे है। इनमें से 650 ही वैध हैं। चौराहों पर स्टील के खंभे लगाकर स्टैंड बना दिया जाएगा। अयूब खां से धर्मकांटा के बीच ई-रिक्शा का संचालन बंद करा दिया गया है।
फैक्ट फाइल ---
ऑटो (सीएनजी) 3550
ऑटो (डीजल) 1250
ऑटो (अवैध ) 3000
ई-रिक्शा कुल 1539
ई-रिक्शा पंजीकृत 650
टेंपो (विक्रम) 900
शहर मेें दौड़ रहे ऑटो और टेंपो के रूट निर्धारित होने के बाद चौराहों पर अनावश्यक दबाव कम होगा और जाम से निजात मिलेगी। हम शहर को चार जोन में बांटने की तैयारी कर रहे हैं। सेटेलाइट, बदायूं, डेलापीर और मिनी बाईपास जोन में बंटने के बाद कोई भी ऑटो या टेंपो अपने जोन से बाहर नहीं चल सकेगा।
- कमलेश बहादुर, एसपी ट्रैफिक
प्लान तो अच्छा है.. बशर्ते लागू हो जाए
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हरेक ऑटो को परमिट ही जंक्शन के 16 किमी दायरे में चलने का मिलता है। ऐसे में उन मार्गों पर दबाव बढ़ जाता है, जिनपर यातायात ज्यादा रहता है। दरअसल, ऑटो वाले ज्यादा सवारियां मिलने की उम्मीद में इन्हीं मार्गों पर दौड़ते रहते हैं। इससे जाम लगता है। अगर जोन व्यवस्था लागू होती है तो जाम की समस्या कम हो जाएगी।
- गुरुदर्शन सिंह, सचिव, आटो रिक्शा चालक कल्याण सोसाइटी
यूनिक आईडी बंटने के बाद जोन व्यवस्था लागू होने से शर्तिया जाम की समस्या में कमी आएगी। ऑटो अपने क्षेत्रों में ही सीमित हो जाएंगे। अब आपराधिक मामले में भूमिका सामने आने पर ऑटो मालिक को भी ढूंढा जा सकेगा। अब तक यह रिकार्ड विभाग के पास नहीं था।
- आरपी सिंह, एआरटीओ
चौराहों और सड़कों पर ऑटो की अधिकता होने से लोगों को जबरन खींच-खींचकर बैठाया जाता है। जोन बंटेंगे तो ऑटो भी कम हो जाएंगे। यूनिक आईडी से उनकी पहचान भी आसान होगी। ऐसे में कोई ऑटो ड्राइवर गलत हरकत नहीं कर सकेगा।
- शंकर सक्सेना, अधिवक्ता
अगर ऑटो के जोन के हिसाब से कलर भी तय कर दिए जाएं तो उन्हें दूसरे जोन में पहुंचने पर आसानी से पहचाना जा सकेगा। इससे यातायात पुलिस को भी आसानी रहेगी। कुछ हद तय यह काम यूनिक आईडी भी करेगी। जोन व्यवस्था लागू होने के बाद जाम की समस्या में कमी आएगी।
- अविनाश कुमार, लिपिक, डोरीलाल अग्रवाल स्टेडियम