पहली जुलाई से लागू हुए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली को दो सप्ताह बीत चुके हैं। कुछ दिनों तक इसे लेकर बाजार में उधल-पुथल, आक्रोश और विरोध चला, लेकिन अब सामान्य स्थिति बनती जा रही है। गुस्साए कपड़ा और सराफा कारोबारी भी पंजीकरण कराने लगे हैं। इस बीच खादी और हैंडलूम आदि कपड़ों पर भी जीएसटी लागू होने से बाजार में कुछ ठहराव है। वहीं, बाइक, इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल बाजार में दाम कम होने से धूम मची हुई है। हालांकि कारोबारी कहते हैं कि कंपनियां नई नीति बनाएंगी तभी कुछ असर दिखेगा। फिलहाल, दवा और खाद्यान्न में अभी कोई खास फर्क नहीं दिख रहा, जबकि दालें और अन्य जिंसाें के दामों में गिरावट आई है।
खादी और हैंडलूम कपड़ा
पर भी लग गया जीएसटी
देश में पहली बार खादी और हैंडलूम कपड़ों पर भी टैक्स लगाया गया है। इसे लेकर निर्माण इकाईयां असमंजस में हैं। हालांकि काउंटराें पर होने वाली सेल में कोई गिरावट नहीं आई है। एडिशनल कमिश्नर वाणिज्य कर एके गुप्ता ने बताया कि सभी तरह के कपड़ों पर जीएसटी प्रणाली लागू है। इसके तहत पांच और 12 फीसदी टैक्स लगेगा। खादी भंडार के प्रबंधक चंद्रमोहन मिश्रा ने बताया कि खादी और उसके बने कपड़ों पर पहली बार टैक्स लगा है। खादी बोर्ड और निर्माण इकाई संस्था छूट देती रहती है, इसलिए कारोबार पर कोई खास फर्क की उम्मीद नहीं है। ग्राहकों से जीएसटी वसूल नहीं हो रहा है, क्योंकि 30 प्रतिशत छूट पहले से लागू है। दो अक्तूबर से नई छूट मिलेगी।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणाें पर नहीं है कोई असर
फ्रिज, एसी, टीवी और वाशिंग मशीन जैसे इलेक्ट्रॉनिक आयटमों पर 28 फीसदी जीएसटी लागू होने का कोई असर बाजार में नहीं दिख रहा है। दो सप्ताह बीत गए, लेकिन बाजार सामान्य है। बताया जा रहा था कि नई कर प्रणाली लागू होने से इलेक्ट्रानिक सामान महंगा हो जाएगा, लेकिन ऐसा ग्राहक महसूस नहीं कर रहे हैं। दामों में ज्यादा फर्क नहीं आया है, क्याेंकि दुकानदार पुरानी कीमतों पर ही छूट के साथ सामान बेच रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक बाजार एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीश अरोरा कहते हैं कि कंपनियां दशहरा और दीवाली से पहले ही नई स्कीम और पैकिंग के साथ कीमतें लागू कर सकती हैं। तभी कुछ जीएसटी का असर दिख सकता है।
दो पहिया वाहनों पर तो छूट की बरसात है
जीएसटी लागू होने से पहले बाइक खरीदने जाने पर 1000 से 1500 रुपये की छूट देने में भी दुकानदार हिचकिचाते थे, लेकिन इस समय तो दो पहिया वाहनों पर छूट की बरसात चल रही है। यह छूट सीमित अवधि के लिए नहीं है बल्कि हमेशा ही मिलेगी क्योंकि जीएसटी लागू होने से दो पहिया वाहनाें के दाम गिरे हैं। इनकी कीमतों में 1500 से 2000 रुपये का अंतर आया है। हीरो बाइक सिविल लाइंस के जीएम आलोक ने बताया कि दो पहिया वाहनों के खरीदार कम नहीं हुए हैं। पीलीभीत बाईपास हीरो शोरूम के मालिक पंकज अग्रवाल ने बताया कि छूट से बाजार अच्छा हुआ है।
सस्ती दवा के लिए अभी और इंतजार
जीएसटी लागू होने के बाद इंसुलिन और टीबी की दवाआें के साथ कई अन्य जरूरी दवाआें के सस्ते होने की संभावना थी। अभी बाजाराें से पुराना स्टॉक ही खत्म नहीं हुआ है इसलिए अभी सस्ती दवाआें के लिए इंतजार करना होगा। कई दवाआें के एचएसएन कोड ही नहीं आए हैं, जिससे उनकी सप्लाई धीमी हो गई है। इस माह के बाद इंसुलिन के दामों में करीब 8 से 10 फीसदी की कमी आ सकती है। महानगर केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष दुर्गेश खटवानी ने बताया कि जुलाई के बाद जो माल बनाया गया है उस पर जीएसटी का असर दिखेगा और दाम कम होगा। फिलहाल, अभी अंतर नहीं है।
अमीरों की कालीन का टैक्स गरीबाें की दरी पर
जीएसटी के दायरे में गरीबाें की दरी को भी ले आया गया है। अमीरों की कालीन पर जितना टैक्स लगता है उतना ही टैक्स दरी पर भी लगाया गया है। एकदम से 12 फीसदी जीएसटी लगाने से दरियां महंगी हो गई हैं। बरेली में 4000 से 5000 बुनकर इस काम से जुड़े हैं। बड़ा बाजार में दरी विक्रेता अशोक कुमार अग्रवाल ने बताया कि 8 रुपये स्क्वायर फीट में बिक रही दरी का दाम कालीन के दाम के बराबर हो गया है, इससे लोग अब दरी क्यों खरीदेंगे, जबकि पहले यह कर मुक्त था।