बरेली। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी के बाद अधिकतर छात्रों का ख्वाब अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में नौकरी करने का होता है, लेकिन नामी कॉलेज की डिग्री हाथ में न होने के कारण उनका यह ख्वाब परवान नहीं चढ़ पाता। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग कर रहे छात्रों के लिए अच्छी खबर। वह जल्द ही 15 से ज्यादा देशों में आसानी से नौकरी पा सकेंगे। यह मुमकिन होगा नेशनल बोर्ड ऑफ अक्रेडिटेशन (एनबीए) होने के बाद, जिसकी पहल विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग विभाग ने शुरू कर दी है।
शुरुआत इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग से होगी, जिसका एनबीए जून में होगा। एनबीए ने विश्वविद्यालय को प्रोग्राम भेज दिया है। इसके साथ ही कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग की फाइल भी भेजी जा रही है। जून में उसका भी मूल्यांकन होगा। तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार प्रोग्राम (टेकिप-3) के कोआर्डिनेटर डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि अगले सत्र तक इंजीनियरिंग की सभी ब्रांच में मूल्यांकन कराने का प्रयास कर रहे हैं। एनबीए से ग्रेड मिलने के बाद वाशिंगटन एकॉर्ड के अंतर्गत हुए समझौते के तहत 15 से ज्यादा देशों में डिग्री का महत्व बढ़ जाएगा।
इन देशों में बढ़ेगी विवि की डिग्री की वैल्यू
- यूनाइटेड किंगडम, यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, चीन, कनाडा, आयरलैंड, हांगकांग, जापान, कोरिया, मलेशिया, पाकिस्तान, न्यूजीलैंड, पीरू, फिलीपींस, रूस, साउथ अफ्रीका, श्रीलंका, ताइवान, तुर्की
बीएमएस इंजीनियरिंग बंगलूरू कर रहा मदद
टेपिक के तहत बीएमएस इंजीनियरिंग कॉलेज बंगलूरू को विश्वविद्यालय का मेंटर कॉलेज बनाया गया है। एनपीआईयू के तहत 20 अनुभवी शिक्षक भी मिले हैं। एनबीए में प्रोग्राम एजूकेशन ऑब्जेक्ट, प्रोग्राम आउटकम, कोर्स आउटकम का मूल्यांकन होता है। बीएमएस कॉलेज इन्हीं बिंदुओं पर काम कर रहा है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई का तरीका भी बदल रहे हैं। अब छात्र आधारित शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है।