बरेली। तेजी से जहरीली हो रही आबोहवा से इंसान वक्त से पहले ही बूढ़े हो रहे हैं। औसत आयु भी तेजी से घटी है। बरेली कॉलेज के पर्यावरण विज्ञान विभाग में ‘इंवायरमेंटल इशूज एंड चैलेंजेस’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन वक्ताओं ने बढ़ते प्रदूषण के खतरे गिनाए। अल्मोड़ा से आईं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रियंका सागर ने टॉक्सिकोलॉजी एवं मानव स्वास्थ्य को लेकर कहा कि टॉक्सिकेंट एक धीमा जहर है। इसके छोटे-छोटे केमिकल मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव डालते हैं।
उन्होंने कहा कि गाड़ियों के टायर जला दिए जाते हैं जिसमें टॉक्सिकेंट की मात्रा ज्यादा होती है। एक समय था जब इंसानों की उम्र 110 साल तक होती थी आज औसत आयु 63 वर्ष ही रह गई है। इंसान जल्दी बूढ़ा होता जाता है। प्रदूषण से जानवर भी तेजी से बीमार हो रहे हैं और उनकी बीमारियां इंसानों में पहुंच रही है। ओजोन परत में भी छिद्र हो रहे हैं। शिकोहाबाद के नारायण पीजी कॉलेज से आए डॉ. विवेक ने कहा कि खेती में ज्यादा कीटनाशक का उपयोग से भी बीमारियां बढ़ी हैं। उन्होंने आगरा का जिक्र करते हुए कहा कि वहां आलू की खेती में शराब का छिड़काव किया जाता है। इससे कई बीमारियां फैलती हैं। डॉ. केपी सिंह ने कॉलेज आफ हॉर्टीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन जगदलपुर बस्तर में कॉफी उत्पादन के बारे में बताया। वहां की दिक्कतों के बारे में बताया। डिपार्टमेंट ऑफ इंवायरमेंटल साइंस बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी लखनऊ के एसोसिएट प्रोफेसर जीवन सिंह ने कहा प्रदूषित पानी पीने से सबसे ज्यादा बीमारियां होती हैं। उन्होंने काइनेटिक्स स्टडी ऑब्जरवेशन ऑफ फ्लोराइड के बारे में बताया। इंस्टीट्यूट ऑफ सोइल एंड वाटर कन्जर्वेशन देहरादून से आए डॉ. आनंद गुप्ता ने वाटर ट्रीटमेंट बाय यूजिंग मोनू पैराडाइज के बारे में बताया। कार्बन नैनोट्यूब सीएसटी नैनो सॉल्वेंट के बारे में बताया। कार्यक्रम में शामिल होने आए अफगानिस्तान के प्रोफेसर मोहम्मद अकरम अंसारी का स्वागत किया। वह मंगलवार को अपने विचार रखेंगे। इस दौरान डॉ. एपी सिंह, डॉ. अनामिका अग्रवाल, डॉ. निष्ठा सेठ, डॉ. जसपाल सिंह, डॉ. गौरव आदि लोग मौजूद रहे।