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चुनाव सिर पर और लटके काम सिस्टम कमजोर या साहब नाकाम

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बरेली। लावारिस बच्चों को कहां आश्रय दिलाया जाए, यह बाल संरक्षण समिति (सीडब्ल्यूसी) के लिए चुनौती बना हुआ है। आर्य समाज अनाथालय के मैनेजर अमृत लाल नागर का निधन होने के बाद प्रबंधन ने सीडब्ल्यूडी से भेजे जाने वाले बच्चों को रखने से हाथ खड़े कर दिए हैं। वहीं एनजीओ से संचालित एक दूसरा अनाथालय हैं, लेकिन वहां बच्चों को रखने की क्षमता काफी कम है।
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पुलिस या जीआरपी को मिलने वाले लावारिस बच्चे सीडब्ल्यूसी को सौंप दिए जाते हैं, लेकिन इन दिनों समिति इसलिए हलकान है, कि वह इन बच्चों को किसके सुपुर्द करे। शहर में केवल एक ही आर्य समाज अनाथालय है, जो बगैर किसी सरकारी मदद के चलता है। अधिकारियों का इस पर सीधा नियंत्रण भी नहीं है।
अनाथालय प्रबंधन पहले ही सीडब्ल्यूडी से भेजे जाने वाले बच्चों को रखने में असमर्थता जताता रहा है कि उसके पास काफी कम क्षमता है। जहां केवल 25-25 बच्चों को ही रखा जा सकता है। ऐसे में आमतौर पर फुल रहता है। इससे अनाथालय प्रबंध समिति के लोग जिला प्रशासन को भी लिखित तौर पर भी अवगत कराते आए हैं।
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इधर, अनाथालय के लंबे समय तक प्रबंधक रहे अमृत लाल नागर का पिछले माह निधन होने से और दिक्कत खड़ी हो गई। प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि वे करीब 20 साल से अनाथालय की सेवा करते हुए पूरी तरह से समर्पित थे, उनकी तत्काल भरपाई कर पाना बेहद मुश्किल है। इसलिए उन्होंने अब नए बच्चे न भेजने का आग्रह प्रोबेशन अधिकारी से किया है। इधर, छोटे अनाथ बच्चों के लिए एक अन्य स्वयंसेवी संगठन बार्न बेबी फोल्ड के नाम से अनाथालय चला रहा है, इसमें भी केवल 10 बच्चों को ही रखने की क्षमता है।

राजकीय बाल गृह का प्रस्ताव नहीं हो सका पास
शहर में सरकार का खुद का बाल गृह न होने से अधिकारियों के सामने दिक्कत यह है कि वे इन बेसहारा मिलने वाले बच्चों को कहां भेजे? मजबूरी में सीडब्ल्यूडी ऐसे बच्चों को शाहजहांपुर भेज रहा है। इस देखते हुए करीब दो साल पहले जिला प्रोबेशन अधिकारी नीता अहिरवार ने लावारिस बच्चों को आश्रय देेने के लिए राजकीय बाल गृह बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन इसे मंजूरी ही नहीं मिल सकी है।

अनाथालय प्रबंधक के निधन के बाद सीडब्ल्यूसी से भेजे जाने वाले बच्चों को रखना फिलहाल मुमकिन नहीं है। इस संबंध में अधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है कि जब तक व्यवस्थाएं सही न हो जाए, बच्चों को न भेजें। - हर्षवर्धन, प्रधान, आर्य समाज अनाथालय

राजकीय बाल गृह बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था। वह बन जाता तो लावारिस बच्चों को रखने में काफी आसानी होती, लेकिन अभी सरकार से इसे मंजूरी नहीं मिली है। - नीता अहिरवार, जिला प्रोबेशन अधिकारी
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