मुरादाबाद में मंगलवार से होने वाली प्रदेश स्तरीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता में बरेली मंडल की टीम हिस्सा ले सके, इसके लिए शाहजहांपुर के बजाए बरेली में मंडलीय प्रतियोगिता कराई गई, लेकिन यहां टीम बिना मुकाबला कराए ही चुननी पड़ी। बरेली को छोड़ मंडल के किसी कोई भी जिले ने अपनी टीम प्रतियोगिता में हिस्सा लेने नहीं भेजी। दोपहर तक बाकी जिलों की टीमों का इंतजार किया गया, लेकिन टीमें न आने के कारण बरेली के छह खिलाड़ी बिना खेले ही विजेता घोषित कर मंडल की टीम में चुन लिए गए।
प्रदेश स्तरीय बॉक्सिंग की तिथि बदलने से मंडल स्तरीय प्रतियोगिता की तिथि भी बदलनी पड़ी। प्रतियोगिता शाहजहांपुर में प्रस्तावित थी, लेकिन अचानक स्थान बदलकर प्रतियोगिता बरेली के श्री गुलाबराय इंटर कॉलेज में कराई गई। सोमवार को प्रतियोगिता होनी थी। बरेली के छह खिलाड़ी इसमें पहुंचे। दोपहर तक बाकी टीमों का इंतजार किया गया, लेकिन कोई टीम नहीं पहुंची। मजबूरन बरेली के खिलाड़ियों को बिना खेले ही विजेता घोषित कर दिया गया। श्री गुलाबराय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य एसपी पांडेय ने बताया कि बाकी टीमों का इंतजार किया गया, लेकिन टीमें न आने के कारण मंडल की टीम घोषित करनी पड़ी।
बरेली के इन खिलाड़ियों का हुआ चयन
अंडर- 19, 59 किग्रा भार वर्ग में नितिन जोशी एमबी इंटर कॉलेज
अंडर-17, 50-52 किग्रा भार वर्ग में गुलाबराय के जीतू, 54-57 किग्रा भार वर्ग में एफआर के नौशाद, 57-60 किग्रा भार वर्ग में जीआईसी के जहांगीर खान।
अंडर-14, 3 8-40 किग्रा भार वर्ग में गुलाबराय के हिमांशु, 40-42 किग्रा भार वर्ग में एमबी के माइकल नीशू
बदहाली से शुरू बदहाली पर खत्म
बॉक्सिंग और जिम्नास्टिक प्रतियोगिता के साथ बरेली में होने वाली खेल प्रतियोगिताओं का समापन हो गया। जिस बदहाली के आलम में बरेली में खेलकूद प्रतियोगिताएं शुरू हुईं, उसी में खत्म भी हुईं। अधिकतर प्रतियोगिताओं में टीमें नहीं आईं। अव्यवस्थाओं और असुविधाओं के बीच प्रतियोगिताएं र्हुइं। यही हाल बॉक्सिंग और जिम्नास्टिक का हुआ। बॉक्सिंग में बिना खेले ही खिलाड़ी विजेता बन गए। वहीं जिम्नास्टिक में दो-चार खिलाड़ी ही पहुंचे।
खिलाड़ी बोले- ऐसे गद्दों पर नहीं हो सकती बॉक्सिंग
जिला स्तरीय प्रतियोगिता के बाद मंडल की प्रतियोगिता के लिए भी फर्श पर साधारण गद्दे बिछा दिए गए। बरेली के खिलाड़ियों ने कुछ देर प्रैक्टिस की उसी में गद्दे सरकने लगे। खिलाड़ियों का कहना था कि ऐसे गद्दों पर बॉक्सिंग नहीं हो सकती, लेकिन मजबूरी में खेलना पड़ता है। अधिकतर खिलाड़ी स्टेडियम में प्रैक्टिस करते हैं, लेकिन उनको रिंग नसीब नहीं होती। रिंग में उतरने के बाद गद्दों पर खेलने का खामियाजा चुकाना पड़ता है।