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पहले से ही तीन गुना था प्रदूषण, दिवाली पर पांच गुना हो गया, हवा हुई जहरीली

Fri, 09 Nov 2018 12:54 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
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वायु प्रदूषण से दिल्ली में लोगों का दम घुट रहा है। आने वाला समय हर शहर के लिए खतरनाक साबित होगा। इसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पर पटाखे चलाने के समय और ध्वनि की सीमा तय की थी। मगर बरेली में इसका कहीं कोई पालन नहीं हुआ। पूरी रात शहर में पटाखे चलते रहे। इसके चलते शहर के ध्वनि और वायु प्रदूषण में खासा इजाफा हुआ है। दिवाली के दो दिन पहले प्रदूषण स्तर करीब 300 माइक्रोग्राम घनमीटर था जो बढ़कर 482.12 तक पहुंच गया जबकि इसे 100 माइक्रोग्राम घनमीटर से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पर पटाखे चलाने के लिए रात आठ से दस बजे तक का समय निर्धारित किया था। मगर शहर भर में लोग इस आदेश का उल्लंघन करते नजर आए। पुलिस-प्रशासन एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसर भी इस आदेश को लेकर अनभिज्ञ बने रहे, क्योंकि जिले भर में देर रात तक पटाखे चलाने या तेज आवाज में चलाने पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। परिणामस्वरूप शहर में पूरी रात खूब पटाखे चले।

बरेली कॉलेज में वनस्पति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. डीके सक्सेना के निर्देशन में शोध छात्रों ने शहर भर में कई स्थानों पर ध्वनि और पर्यावरण प्रदूषण के आंकड़े लिए। इस दौरान सामने आया कि दिवाली से दो दिन पहले प्रदूषण का स्तर करीब 300 माइक्रोग्राम घनमीटर था जो बढ़कर 482.12 तक पहुंच गया है जबकि यह 100 माइक्रोग्राम घनमीटर के अंदर होना चाहिए था। इसी तरह ध्वनि प्रदूषण भी 75 डेसीबल से ज्यादा नहीं होना चाहिए, जबकि यह 89 डेसीबल तक निकला है।
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वायु प्रदूषण के आंकड़े (माइक्रोग्राम घनमीटर)

स्थान - 5 नवंबर - 7 नवंबर

मॉडल टाउन - 300 - 600

सेटेलाइट - 250 - 380

राजेंद्रनगर - 200 - 510

श्यामगंज - 255 - 300

जाट सेंटर - 165 - 290

सिविल लाइंस - 200 - 500

बरेली कॉलेज पूर्वी गेट - 190 - 490

चौपुला - 260 - 400
 

ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ा निकला

क्षेत्र - ध्वनि प्रदूषण (डेसीबेल में)

राजेंद्रनगर - 88

चौपुला - 86.14

अयूब खां - 85.10

सिविल लाइंस - 89

नेकपुर - 88

श्यामगंज - 84


50 करोड़ पटाखों में फूंके, अब इलाज में पैसा बहाइए
दिवाली पर बरेली में करीब 50 करोड़ रुपये का पटाखों का कारोबार हुआ है। लोगों ने जमकर पटाखे चलाए, जिससे दिवाली के दिन प्रदूषण का स्तर 482.12 माइक्रोग्राम घनमीटर तक पहुंच गया। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी के लिए यह परेशानी बढ़ाएगा। चिकित्सकों की सलाह है कि कम से कम आठ दिन तक सुबह-शाम का टहलना बंद रखें। सांस एवं दमा के मरीज खासतौर पर एहतियात बरतें। बच्चों को भी ज्यादा देर बाहर न खेलने दें। सांस के मरीजों के लिए यह समय ज्यादा खतरनाक है और उन्हें अस्पताल जाना पड़ सकता है।
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विशेषज्ञों की बात
इस प्रदूषण का असर करीब 15 दिन तक रहेगा क्योंकि इन दिनों हवा भी नहीं चल रही है। मौसम बदलने के कारण नमी भी है और ओस भी पड़ रही है। ऐसे में इसका असर खत्म होने में कम से कम 15 दिन लगेंगे। - डॉ. डीके सक्सेना, प्रभारी सेंटर फॉर इन्वायरमेंटल बरेली कॉलेज

सरकार को आगे आकर इस पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। 50 साल से ऊपर के लोग, खासतौर पर डायबिटीज, अस्थमा आदि के मरीज नाक पर मास्क लगाएं। सुबह-शाम का टहलना तो बिल्कुल बंद कर दें। प्रदूषित हवा की वजह से सांस की समस्या बढ़ जाएगी। ऐसे में बच्चों को भी ज्यादा देर तक बाहर न खेलने दें। -डॉ. एके चौहान, हृदयरोग विशेषज्ञ

पटाखों का धुआं सबसे ज्यादा फेफड़ों को प्रभावित करता है। इससे स्वस्थ लोग भी प्रभावित होंगे। दमा और सांस वालों के लिए ज्यादा घातक है। सांस के मरीज जो इस समय ठीक चल रहे हैं, वे भी दो-तीन में अस्पताल पहुंचने की स्थिति में आ जाएंगे। सांस के मरीजों को दौरा पड़ सकता है और निमोनिया भी हो सकता है। - डॉ. सुदीप सरन, फिजीशियन

पटाखों से प्रदूषित हवा सांस के जरिये नाक और गले में जाती है तो इससे एलर्जी होने के अलावा इनकी खाल में सूजन आ जाती है। इसके कारण सांस लेने में दिक्कत होती है। सांस तो लेनी ही है और वह अगर प्रदूषित है तो कई बार सांस फूलने लगती है। इसके कारण आखों में भी जलन की समस्या होती है। - डॉ. देवेंद्र प्रसाद, ईएनटी विशेषज्ञ

हवा में प्रदूषण से आंखों में जलन होती है और वातावरण में मौजूद जहरीली गैस से आंख की रोशनी भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में लोग सुबह-शाम टहलने से बचें और बीच-बीच में ताजे पानी से आंखों को धोते रहें। इससे जहरीली गैसों का प्रभाव आंखों पर कम होगा। - डॉ. महेंद्र सिंह बासु, नेत्र रोग विशेषज्ञ
 
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