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विवि की प्रोफेसर ने दूसरे की रिसर्च अपने नाम से करा ली प्रकाशित

Tue, 24 Jul 2018 12:35 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
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MJP Rohilkhand university
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एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय की एक महिला प्रोफेसर ने लखनऊ के प्रोफेसर का रिसर्च पेपर यूजीसी के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अपने नाम से प्रकाशित करा लिया। लखनऊ के प्रोफेसर ने जब कुलाधिपति से शिकायत की तो उन्होंने मामला कुलपति के पास भेज दिया। कुलपति ने इंटरनल जांच शुरू करा दी है। साथ ही विश्वविद्यालय ने महिला प्रोफेसर के प्रमोशन की फाइल रोक दी है।
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एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर ने प्रमोशन के लिए अपने दो रिसर्च पेपर एक रिसर्च जर्नल में प्रकाशित कराए। शिकायती पत्र में लखनऊ के प्रोफेसर ने दावा किया है कि दोनों रिसर्च पेपर उनके हैं, लेकिन रुहेलख्ंाड विश्वविद्यालय की प्रोफेसर ने अपने नाम से इन्हें प्रकाशित करा लिए है। कुछ दिन पहले ही महिला प्रोफेसर का प्रमोशन के लिए इंटरव्यू हुआ था। राजभवन से मामला पहुंचने के बाद कुलपति ने प्रमोशन की फाइल रोक दी है। महिला प्रोफेसर के खिलाफ आंतरिक जांच कराई जा रही है। इस संबंध में महिला प्रोफेसर का कहना है कि उन्होंने लखनऊ के प्रोफेसर के साथ दो रिसर्च पर कार्य किया था। इसी आधार पर उनका प्रकाशन कराया। यूजीसी के नियमानुसार अगर दो प्रोफेसर रिसर्च करते हैं तो उस पर दोनों का अधिकार है। कोई एक अपने नाम से प्रकाशित नहीं करा सकता। ये मामला एक तरह से रिसर्च चोरी का है। मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय में खलबली मच गई है।

विवि में कई और प्रोफेसरों पर भी है रिसर्च चोरी का शक
यूजीसी के नियमानुसार शिक्षकों का प्रमोशन एकेडमिक परफार्मेंस इंडेक्स (एपीआई) स्कोर के आधार पर ही होगा, इसमें रिसर्च पेपर भी शामिल है। महिला प्रोफेसर का मामला सामने आने के बाद कुछ अन्य प्रोफेसरों पर भी रिसर्च पेपर चोरी करने का शक जताया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो विश्वविद्यालय अंदरखाने उनकी भी जांच करा रहा है, इनके प्रमोशन हुए या प्रमोशन होने वाले हैं। जो रिसर्च पेपर प्रकाशित दिखाए गए हैं उनको क्रॉस चेक किया जाएगा।
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राजभवन से एक पत्र आया है। किसी ने शिकायत की है। शिकायतकर्ता का दावा है कि जो रिसर्च पेपर उसके थे वे रुहेलखंड विश्वविद्यालय की एक शिक्षिका ने अपने नाम से प्रकाशित करा लिए हैं। मामले की जांच कराई जा रही है। शिकायत कर्ता से भी सबूत और एफिडेविट मांगा है। - प्रोफेसर अनिल शुक्ल, कुलपति
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