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बिना काम भुगतान, वीसी साहब ये हो क्या रहा है विवि में

Tue, 10 Jul 2018 12:22 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
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MJP Rohilkhand university
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 एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में कर्मचारियों ने भ्रष्टाचार और वित्तीय अनिमितताओं के आरोप लगाते हुए सोमवार को अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया। अनशन स्थल पर कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन बगैर काम भुगतान और टेंडर निकाले बिना निर्माण कराने जैसे तमाम आरोप लगाए और जांच की मांग की। प्रदर्शन के चलते विश्वविद्यालय में प्रशासनिक कार्य ठप हो गए। दूरदराज से आए छात्र और अभिभावकों को निराश होकर लौटना पड़ा।
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मिनिस्ट्रियल स्टॉफ एसोसिएशन मांगों को लेकर कई बार कुलपति और कुलसचिव को पत्र सौंप चुके हैं जो अभी तक लंबित हैं। इससे नाराज कर्मचारी सोमवार से बेमियादी अनशन पर बैठ गए। सुबह ही प्रशासनिक भवन बंद हो गया। कुछ देर बाद कुलपति और कुलसचिव भी चले गए जिसके बाद प्रशासनिक भवन के तीनों गेट पर बंद कर दिए गए। मार्कशीट, डिग्री व अन्य प्रमाणपत्र के लिए आए सैकड़ों छात्र और उनके अभिभावक परेशान होकर लौट गए। कुछ छात्रों ने हंगामा भी किया। प्रशासनिक भवन के साथ विभागों का कार्य भी ठप रहा।

कर्मचारियों ने अधिकारियों पर मढ़े आरोप
अनशन के दौरान कर्मचारी नेताओं ने कैंपस में भ्रष्टाचार की परतें कुरेदीं। कर्मचारी नेता अनिल सिंह ने कहा कि शौचालयों की मरम्मत के लिए विश्वविद्यालय ने 32 लाख का भुगतान कर दिया, लेकिन काम नहीं हुआ। बिना टेंडर फर्नीचर खरीद लिया गया। किताबें खरीदने में मोटा कमीशन लिया गया। कहा कि कर्मचारियों का प्रमोशन नहीं किया जा रहा जबकि योग्यता पूरी न करने वाले शिक्षकों को प्रमोशन कर दिया गया। नियुक्तियों में भी भ्रष्टाचार किया गया। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. हेम गौतम ने कहा कि मांगे पूरी नहीं हुईं तो अनशन जारी रहेगा। इस मौके पर महाचिवव राज बहादुर, जहीर अहमद, दीप जोशी, ओपी मिश्रा, अनिल गुप्ता, ओपी द्विवेदी, रामप्रीत, आदिल समेत बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे।
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उठाए सवाल
-अटल सभागार के लिए 30 करोड़ से ज्यादा खर्च होंगे, योजना के लिए सरकारी ग्रांट क्यों नहीं मांगी गईं।
-विभिन्न निर्माण कार्य बिना ई-टेंडर के दे दिए गए। कमीशनखोरी के लिए मनमाने कार्य कराए जा रहे हैं। टेंडर क्यों नहीं निकाले गए।
-विभागों के लिए फर्नीचर खरीदा गया जबकि कर्मचारी उसी टूटे फूटे फर्नीचर में बैठते हैं। फर्नीचर के लिए टेंडर भी नहीं निकाला गया।
- प्रशासनिक अधिकारियों पदों पर कर्मचारियों को प्रोन्नत किया जाए जबकि इन पदों पर शिक्षकों को बैठाया जा रहा है।
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