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रसूखदारों को खैरात में बांट दी करोड़ों की शत्रु संपत्ति

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पीलीभीत। डीएम आवास के पास करोड़ों की बेशकीमती जमीन रसूखदारों को खैरात में देकर ध्यान योग केंद्र स्थापित कराने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। प्रधानमंत्री ऑफिस (पीएमओ) के रिपोर्ट मांगने पर जब एसडीएम सदर वंदना त्रिवेदी ने जांच की तो कई बीघा जमीन शत्रु संपत्ति में दर्ज पाई गई। ऐसे में रसूखदारों को बेशकीमती जमीन देने वाले कई अफसरों पर कार्रवाई तय है। जांच में यह भी पता चला है कि रसूखदारों को लाभ पहुंचाने के लिए जमीन बैनामा भी करा दिया गया।
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सरकारी जमीनों से कब्जा हटाने को लेकर शासन चाहे कितनी भी संजीदगी दिखाए, लेकिन इसकी जिम्मेदारी संभालने वाले अफसर जब तक नहीं चाहेंगे तब तक कुछ नहीं हो सकता। ऐसा ही एक मामला पीलीभीत-टनकपुर हाईवे पर डीएम आवास के बराबर में स्थित भूमि पर कब्जे का है। ग्रीन बेल्ट की यह जमीन शत्रु संपत्ति है। शहर के कुछ रसूखदारों ने जिले के एक तत्कालीन बड़े अफसर के संरक्षण में करोड़ों की इस बेशकीमती जमीन पर कब्जा कर लिया था। उक्त जमीन पर विनायक चैरिटेबल ट्रस्ट बनाकर ध्यान योग केंद्र स्थापित करा दिया गया। ताकि कोई उंगली न उठा सके। चूंकि रसूखदारों को जिले के एक बड़े प्रशासनिक अफसर का संरक्षण प्राप्त था सो बाकी अधिकारी संज्ञान में होने के बावजूद इससे अंजान बने रहे। खास बात तो यह रही कि ध्यान योग केंद्र बनाने के नाम पर शीशम, अर्जुन समेत कई दर्जन पेड़ भी वन विभाग की बिना अनुमति के काट दिए गए।
इधर, लोकसभा चुनाव के बाद डीएम वैभव श्रीवास्तव ने इस जमीन का संज्ञान लिया तो हड़कंप मच गया। ग्रीन बेल्ट की भूमि पर अवैध कब्जा करने की बात सामने आने पर डीएम ने तत्काल कब्जा हटवाने के सिटी मजिस्ट्रेट को निर्देश दिए। कार्रवाई के डर से आनन-फानन में रासूखदारों ने जेसीबी मशीनों की सहायता से ध्यान योग केंद्र क्षेत्र में डाली गईं झोपड़ी और अन्य व्यवस्थाओं को हटवा दिया।
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इधर, इसे लेकर शोर मचा तो मामला पीएम और सीएम कार्यालय तक पहुंच गया। पीएमओ कार्यालय से पूरे मामले की रिपोर्ट जिला प्रशासन से तलब की गई। इसके बाद गंभीर हुए अफसरों ने जांच पड़ताल शुरू की। एसडीएम सदर वंदना त्रिवेदी की जांच में जो खुलासा हुआ उससे जिले में हड़कंप मच गया है। गाटा संख्या के आधार पर खतौनी की जांच की गई तो पता चला कि यह जमीन तो शत्रु संपत्ति है। इसका नाजायज तरीके से शहर के कई बड़े रसूखदारों के नाम बैनामा कर दिया गया है।

जमीन का असल मालिक संपत्ति छोड़ जा चुका है पाकिस्तान
एसडीएम की जांच में जमीन का असल मालिक दशकों पूर्व अपनी संपत्ति छोड़ पाकिस्तान जा चुका है। जिस गाटा संख्या का जिक्र किया गया है, उसमें बेनहर पब्लिक स्कूल के प्रबंधक परविंदर सहमी, उनके बेटे गुदित्त सहमी, समाजसेवी सतीश जायसवाल, दुर्गादास राजानी, सतवंत पाल सिंह और मंजू नाथ आदि के नाम बैनामा किया जाना पाया गया है। नियामनुसार शत्रुसंपत्ति की खरीद फरोख्त नहीं हो सकती है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि ध्यान योग केंद्र स्थापित कर सरकारी जमीन कब्जाने का मामला शुरू से जो सुर्खियों में चल रहा था, वह सही निकला।

खतौनिया गायब होने का भी अंदेशा
ध्यान योग केंद्र के नाम पर शत्रु संपत्ति की जमीन कब्जाने के मामले में एक बड़ा खुलासा ये भी है कि इसमें कई खतौनियों को भी गायब किया गया है। यह अंदेशा भी अफसरों को प्रतीत होने लगा है। जिसके बाद इस दिशा में भी जांच कराने का दावा शुरू कर दिया है। या यूं कहें कि अब फजीहत के बाद अफसर खुद के सख्त होने की दुहाई देने में जुट गए हैं। एसडीएम सदर वंदना त्रिवेदी ने बताया कि अभी तक हुई जांच में जमीन शत्रु संपत्ति की पाई गई है। इसका असल मालिक पाकिस्तान जा चुका है। इस जमीन की कोई खरीद फरोख्त नहीं की जा सकती, फिर भी बैनामा हो गया। यह सरासर गलत है।

मामले की जांच एसडीएम सदर से कराई गई। जिसमें शत्रु संपत्ति होने का पता चला है। इस मामले की और गहनता से जांच कराई जा रही है। जल्द ही जांच पूरी होने पर इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी।
- वैभव श्रीवास्तव, डीएम

जिस जमीन के गाटा संख्या को शत्रु संपत्ति दर्शाया जा रहा है। उसे 2011 में मैंने सतीश जायसवाल के साथ मिलकर खरीदा था। इसका दाखिल खारिज भी मेरे पास है। प्रशासन आगर साक्ष्य मांगता है तो उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
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-परविंदर सहमी, प्रबंधक, बेनहर पब्लिक स्कूल
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