बरेली। मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम में आरटीआई एक्टिविस्ट जैसा कोई शब्द ही नहीं है न एक्ट में इसे परिभाषित किया गया है। विकास भवन सभागार में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में मुख्य सूचना आयुक्त ने जन सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारियों को बताया कि किसी भी आवेदक को सूचना स्पष्ट तथ्यों सहित देनी है। उसे परेशान नहीं करना चाहिए। अगर कोई जन सूचना अधिकारी ऐसा करेगा तो उस पर 250 रुपये का रोजाना अर्थ दंड लगेगा। जन सूचना अधिकारी 30 दिन में सूचना नहीं देते तो उसकी अपील करें। सुनवाई में एक मौका जन सूचना अधिकारी को भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर आरटीआई आवेदक बहुत परेशान हो चुका है तो उसे मुआवजा देने का भी आदेश पारित किया जा सकता है। रिसोर्स परसन राजेश मेहतानी ने जनसूचना अधिनियम 2005 और जन सूचना अधिकार अधिनियम 2015 के नियमों की विस्तार से जानकारी दी।