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अवैध खनन पर महीने भर जमकर रार चली, आखिर नप गए बहेड़ी इंस्पेक्टर

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बरेली। बहेड़ी में अवैध खनन पर करीब महीने भर तक जमकर रार चली। शुरुआत इंस्पेक्टर के भाजपा विधायक के करीबी नेता पर एफआईआर दर्ज करने से हुई और फिर विधायक ने भी इंस्पेक्टर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। अफसरों को 48 घंटे का अल्टीमेटम देकर पूरी ताकत भी लगाई, फिर भी इंस्पेक्टर को हिला नहीं पाए। इंस्पेक्टर ने जरूर एक और पलटवार किया और ईद के दिन छापा मारकर एक और अवैध खनन का बड़ा मामला पकड़कर एफआईआर दर्ज कर ली। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान तो अफसर इंस्पेक्टर को हटाने के दबाव के आगे जरा भी टस से मस नहीं हुए लेकिन उनकी चिंता तब बढ़ी जब यह प्रकरण मुख्यमंत्री योगी तक पहुंचाने की कोशिश होने लगी। इंस्पेक्टर की भूमिका पर मुख्यमंत्री के आगे जवाब देना मुश्किल लगने लगा तो आखिरकार उन्हें पुलिस लाइन बुला लिया गया।
बताया जाता है कि इंस्पेक्टर धनंजय सिंह की बहेड़ी में चार्ज संभालने के बाद से ही विधायक और उनके समर्थकों से नहीं बनी। तीन जून को इंस्पेक्टर ने उझानी के एक खनन पट्टेदार की तहरीर पर विधायक छत्रपाल सिंह के करीबी समर्थक और भाजपा के जिला उपाध्यक्ष मोहन सिंह समेत पांच लोगों को नामजद करते हुए 15 लोगों पर एफआईआर दर्ज की तो खुली जंग शुरू हो गई। बदायूं के एक कद्दावर नेताजी का हाथ होने की वजह से खनन का यह पट्टेदार भी बहेड़ी की किच्छा नदी में बगैर रायल्टी अदा किए ही खनन कर रहा था। अपने समर्थकों पर कार्रवाई हुई तो विधायक भाजपा जिलाध्यक्ष समेत कई नेताओं के साथ पुलिस उच्चाधिकारियों से मिले और उन्हें 48 घंटों के अंदर इंस्पेक्टर को हटाने का अल्टीमेटम दे दिया। अफसरों ने विधायक को जांच का दिलासा तो दे दिया, लेकिन इंस्पेक्टर को बहेड़ी से नहीं हटाया।
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विधायक एक तरफ यह मोर्चाबंदी करते रह गए, दूसरी तरफ इंस्पेक्टर ने उनके अल्टीमेटम का समय पूरा होने से पहले ही ऐन ईद के दिन कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में भारी व्यस्तता के बावजूद छापा मारकर अवैध खनन का एक और बड़ा मामला पकड़ लिया। दो पोकलैंड मशीने भी सीज कर एफआईआर दर्ज कर ली। बताया गया कि यह अवैध खनन एक माननीय का भतीजा करा रहा था। हैरतअंगेज ढंग से इसके बाद इंस्पेक्टर का विरोध भी काफी हद तक शांत हो गया और भाजपा नेता दोबारा उनके ट्रांसफर का दबाव बनाने अफसरों तक नहीं पहुंचे। मगर हाल ही में गुपचुप ढंग से इस मामले को मुख्यमंत्री योगी तक पहुंचाने की कोशिश होने लगी। प्रभारी मंत्री बृजेश पाठक के सामने भी यह मामला उठा। आखिरकार सोमवार को एसएसपी ने बताया कि इंस्पेक्टर धनंजय सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया है।

पट्टे रद्द होने के बाद सीओ ने की समझौता कराने की कोशिश
बहेड़ी में अवैध खनन का मामला शासन तक पहुंच चुका है। चार दिन पहले ही शासन से बहेड़ी में खनन के दोनों पट्टे रद्द कर दिए गए थे। इसके अगले ही दिन सीओ बहेड़ी आलोक अग्रहरि ने इंस्पेक्टर और विधायक को अपने दफ्तर में बैठाकर दोनों के बीच समझौता कराने के लिए घंटों बातचीत कराई थी। सूत्रों के मुताबिक इस बातचीत में अवैध खनन पर टकराव का मुद्दा भी उठा। लंबी बातचीत के बावजूद बाहर आकर किसी भी पक्ष ने कोई टिप्पणी नहीं की। बताया जाता है कि बदायूं के एक कद्दावर भाजपा नेता के दबाव में खनन दोबारा शुरू कराने के प्रयास में पुलिस लगी थी, लेकिन इसी बीच इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर कर दिया गया। हालांकि इससे पहले इंस्पेक्टर-विधायक के बीच चले लंबे विवाद में अफसरों ने मौन रहकर सत्ताधारी पार्टी की अच्छी-खासी फजीहत करा दी।

कार्रवाई होने से पहले ही अवकाश पर चले गए धनंजय सिंह
बहेड़ी में अभी नए इंस्पेक्टर की तैनाती नहीं की गई है। तेजतर्रार माने जाने वाले इंस्पेक्टर धनंजय सिंह लाइन हाजिर होने से पहले अपने पारिवारिक वजह बताकर अवकाश पर कानपुर अपने घर चले गए। इंस्पेक्टर धनंजय सिंह उस समय चर्चा में आए थे, जब तीन जून को उन्होंने विधायक समर्थक भाजपा नेता मोहन सिंह समेत पांच नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ रंगदारी मांगने समेत कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। तब भाजपा विधायक समेत उनके समर्थकों की थाने में इंस्पेक्टर से नोकझोंक हो गई थी। तबसे विधायक और उनके समर्थक इंस्पेक्टर को लगातार हटाने की मांग को लेकर अफसरों से मिल रहे थे। विधायक ने इंस्पेक्टर हटाने के लिए अन्य विधायकों का हस्ताक्षर अभियान भी चला रखा था।
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जो आदेश मिलेगा उसका पालन किया जाएगा। हमें तो नौकरी करनी है, जहां भी भेजा जाएगा काम करेंगे। वैसे अभी मैं छुट्टी पर हूं। - धनंजय सिंह, इंस्पेक्टर बहेड़ी
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