बरेली। मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी ने कहा कि जन सूचना अधिकार अधिनियम-2005 क्रांतिकारी एक्ट है, जिसके लागू होने के बाद सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आयी है मगर अभी भी इसमें सुधार की गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि यूपी में आरटीआई के 50 हजार केस लंबित हैं। हर महीने तीन हजार नई अपीलों के केस फाइल हो रहे हैं। इनके निस्तारण की धीमी गति चिंता का विषय है। उन्होंने चेतावनी दी कि कोई भी जन सूचना अधिकारी आरटीआई के आवेदन को बेवजह लंबित न रखे वर्ना उसे दंडित किया जाएगा।
विकास भवन सभागार में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य सूचना आयुक्त ने कहा कि 2013-14 में सूचना आयोग में सिर्फ एक मुख्य सूचना आयुक्त और दो सूचना आयुक्त थे। ज्यादातर पद खाली रहने से भारी संख्या में अपीलें लंबित हो गईं। अब सभी पद भरे हुए हैं। अपीलों का जल्द निपटारा कराने का प्रयास किया जा रहा है। राज्य के सरकारी दफ्तरों में 20 हजार जन सूचना अधिकारी और आठ हजार प्रथम अपीलीय अधिकारी हैं। उन्हें कोई आरटीआई आवेदन बेवजह लंबित न रखने की हिदायत दी गई है। आवेदकों को सही और 30 दिन की तय समयसीमा के अंदर सूचना देने को कहा गया है ताकि शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आने के साथ भ्रष्टाचार पर रोक लगे और सरकार गुड गवर्नेस की दिशा में आगे बढ़े। बीपीएल आवेदक को निशुल्क सूचना देनी होगी। आवेदन प्रारूप पर नहीं है तो भी उसे निरस्त नहीं किया जा सकता। पेन ड्राइव या ई-मेल पर आरटीआई की सूचना नहीं दी सकती लेकिन सूचना कंप्यूटर पर है तो सीडी पर दे सकते हैं। इस दौरान कमिश्नर रणवीर प्रसाद, डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह, सीडीओ सत्येंद्र कुमार समेत जनसूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी मौजूद थे।