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वाह नेताजी! खनन में आड़े आए ‘आका’ से घबराते हो और बाकी पर गुर्राते हो

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बरेली। वैसे तो इस पर कोई सवाल ही नहीं उठता कि बहेड़ी में अवैध खनन की कमाई पर बहेड़ी के ही नेताजी का हक होना चाहिए लेकिन बदायूं जिले के एक दमदार नेताजी ने सियासत के इस ‘स्थापित सिद्धांत’ की ऐसी-तैसी कर दी। बहेड़ी वाले नेताजी काफी समय से उत्तराखंड और हरियाणा के ठेकेदार बुलाकर किच्छा नदी में पोकलैंड मशीनें और लिफ्टर से खनन करा रहे थे कि बदायूं वाले नेताजी ने अपने इलाके के ठेकेदारों को बहेड़ी में भेजकर उनका सारा खेल बिगाड़ दिया। बदायूं के ठेकेदारों ने जब बहेड़ी के नेताजी के हक पर चोट शुरू की तो बात और ज्यादा बिगड़ गई, लेकिन मामला कुछ ऐसा घूमा कि उनके निशाने पर इंस्पेक्टर बहेड़ी आ गए। हालांकि बदायूं वाले नेताजी के रुतबे ने ऊपर तक सबकुछ सेट कर दिया। बहेड़ी वाले नेताजी ने लाख कोशिश की, लेकिन इंस्पेक्टर को हिला नहीं पाए।
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बहेड़ी में किच्छा नदी से अवैध खनन लंबे समय से चल रहा है। खनन के लिए उत्तराखंड के एक ठेकेदार ने पोकलैंड मशीनें भी खरीद रखी हैं। बहेड़ी के बगल के गांव मोहम्मदपुर, रुड़की, मुड़िया मुकर्रम समेत मीरगंज में आने वाले कुछ गांवों में भी इस कदर खनन किया गया है कि ज्यादा बरसात के दौरान इन गांवों के बाढ़ की चपेट में आने का खतरा पैदा हो गया है। बहेड़ी यह चर्चा भी आम है कि काफी समय से यहां अवैध खनन एक नेताजी और उनके भतीजे के दम पर हो रहा है। इन नेताजी ने खनन के लिए हरियाणा और उत्तराखंड के ठेकेदार बुला रखे हैं। उनके चार ठेकेदार ट्यूली और नारायन नगला के साथ मोहम्मदुर और मुड़िया मुकर्रम गांवों से लंबे समय से खनन करा रहे हैं। विवाद तब शुरू हुआ जब बदायूं के एक दिग्गज नेता ने अपने इलाके के ठेकेदारों को भी बहेड़ी में किच्छा नदी में खनन करने का पट्टा दिला दिया।
सूत्रों के मुताबिक बदायूं के नेताजी की छत्रछाया के कारण ही उनका ठेकेदार रॉयल्टी अदा न करने के बावजूद लगातार बहेड़ी में खनन कराता रहा। उसके खनन से बहेड़ी के नेताजी बड़ा नुकसान होने लगा तो यह विवाद आमने-सामने की जंग में बदल गया। बहेड़ी के नेताजी के समर्थकों ने बदायूं के पट्टाधारक का विरोध शुरू कर दिया। इस जंग में इंस्पेक्टर भी फंस गए और नौबत उनके बलि का बकरा बनने तक पहुंच गई। लेकिन बदायूं वाले नेताजी ने उनका कुछ बिगड़ने नहीं दिया। बहेड़ी वाले नेताजी को जब असलियत का पता लगा तो वह भी शांत हो गए। नतीजा यह हुआ कि पट्टे निरस्त होने के बावजूद खनन फिर शुरू हो गया। अब रात के अंधेरे में खनन किया जा रहा है।
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