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बरसात में जमीन के पोषक तत्व असंतुलन का खतरा

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बरेली। मृदा स्वास्थ्य परीक्षण में बड़ा घोटाला उजागर होने के बाद से प्राइवेट मृदा स्वास्थ्य परीक्षण लैब बंद हैं। सरकारी लैब में किसान अपने खेत की मिट्टी के नमूने लाकर परीक्षण कराने के प्रति उदासीन हैं। ऐसे में मानसून आने पर जमीन के पोषक तत्वों जैसे कार्बन, नाइट्रोजन, पोटाश, जिंक, कॉपर, बोरान आदि के असंतुलित होने का खतरा है। सरकारी लैब के मृदा स्वास्थ्य परीक्षण की गुणवत्ता पर किसान पूरी तरह से विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि कृषि विभाग ने बीते डेढ़ साल में 65 हजार 944 मृदा नमूनों के परीक्षण का दावा किया है।
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केंद्र सरकार ने ग्रामीण अंचल में किसानों को खेत की मिट्टी का स्वास्थ्य ठीक करने के लिए मृदा परीक्षण योजना प्रारंभ की थी। इसका उद्देश्य मृदा परीक्षण परिणाम के आधार पर खेतों में रसायन या जैविक उर्वरक का इस्तेमाल करना था, ताकि फसल की लागत में कमी लाकर बेहतर उत्पादन किया जा सके। पहले किसान कार्बन, नाइट्रोजन, पोटाश, जिंक, कॉपर, बोरान आदि जमीन के तत्वों की जांच निर्धारित शुल्क देकर कराते थे। 2015 में मोदी सरकार ने किसानों के खेत से मृदा लाकर उसका निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कराने की व्यवस्था की। इसके लिए किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जाने थे। कृषि विभाग ने अब तक सभी किसानों के खेत का न तो मृदा नमूनों का परीक्षण कराया, न ही उनको मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो मानसून सीजन में खेतों में पानी की मात्रा क्षमता से अधिक रहती है। उससे नमी बढ़ने पर मिट्टी की उर्वरा तत्वों का संतुलन गड़बड़ा जाता है, जिसका असर फसल उत्पादन पर पड़ता है। बरसात होने के बाद मृदा नमूने लेने बंद कर दिए जाते हैं। इधर, किसान सरकारी लैब में मृदा नमूनों का परीक्षण कराने के प्रति उदासीन हैं।

कृषि विभाग की लैब में लाए गए मृदा नमूनों के परीक्षण का काम लगातार चल रहा है। उसकी गुणवत्ता में कहीं कोई कमी नहीं है। प्राइवेट लैब फिलहाल बंद चल रहीं हैं। उनमें मृदा नमूनों का परीक्षण नहीं कराया जा रहा है।
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-देवेंद्र सिंह गंगवार, लैब अध्यक्ष कृषि विभाग
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