बरेली। नगर निगम का अतिक्रमण हटाओ अभियान गरीबों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। सिटी मजिस्ट्रेट की अगुवाई में नगर निगम की टीम ने शुक्रवार को जंक्शन से कचहरी तक अतिक्रमण चिह्नित कर लाल निशान लगाए। मगर कार्रवाई की जद में सिर्फ खोखा, ठेले वाले ही दुकानदार और कुछ वकीलों के बिस्तर ही आए। यहां शनिवार को कार्रवाई की जाएगी। वहीं स्टेशन रोड पर नाला जमींदोज कर उस पर कितनी बिल्डिंग बनाई गईं, यह देखने की किसी ने जहमत नहीं उठाई। इससे नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठ रहा है।
शुक्रवार की दोपहर सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार और अतिक्रमण हटाओ अभियान प्रभारी ललतेश सक्सेना ने अपनी टीम के साथ जंक्शन से कार्रवाई शुरू की। चौकी के पास सड़क किनारे लगे ठेला-खोला पर लाल निशान लगाते हुए निगम की टीम आगे बढ़ी। दुकानों के आगे लटके बैनर तक पर लाल निशान लगा दिए गए। सबसे ज्यादा चिह्नीकरण रोजगार दफ्तर से कचहरी चौराहे के बीच नाले पर रखे खोखा और फड़ पर किया गया। इस बीच करीब सौ कब्जों पर लाल निशान लगाए। साथ ही सिटी मजिस्ट्रेट ने शनिवार तक कब्जा न हटाने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
आबकारी भवन के पास से गायब हुआ नाला
कचहरी से जंक्शन की ओर करीब डेढ़ मीटर चौड़ा नाला भी है। रोजगार कार्यालय तक तो यह नाला खुला है, लेकिन इसके बाद नाले का कोई पता नहीं है। यह नाला आबकारी कार्यालय के अंदर तो पहुंचता है, लेकिन दूसरी ओर से निकलता भी नहीं है। इसके आगे बंदूकों की दुकानें और तमाम नामचीन होटल हैं।
पहले सड़क की पैमाइश से तय होते थे कब्जे
पिछले साल अतिक्रमण हटाने से पहले नगर निगम और पीडब्ल्यूडी की टीम सड़क की पैमाइश करके तय करती थी कि कितने हिस्से पर अतिक्रमण है। मगर इस बार पैमाइश करने वालों को अतिक्रमण दस्ते में शामिल ही नहीं किया गया है। इसके चलते कार्रवाई अस्थायी कब्जा करके फड़-ठेला लगाने वालों पर हो रही है। सड़क की जमीन कब्जा करके पक्के निर्माण करने वालों को कोई पूछ भी नहीं रहा है।