बहेड़ी (बरेली)। लखीमपुर थाना गांव में दोनों हाथी गुरुवार रात भर वहीं दो किलोमीटर के दायरे में विचरण करते रहे। सुबह 15 किलोमीटर दूरी तय कर उत्तराखंड की सीमा पर हाजापुर गांव तक गए, फिर वापस बहेड़ी तहसील के गांव मनुआपट्टी आ गए। दिनभर मनुआपट्टी में रहने के बाद शाम करीब साढ़े छह रामपुर सीमा में दाखिल होकर एक गन्ने के खेत में रुक गए। हाथियों की हर गतिविधि पर ड्रोन कैमरे से टाइगर रिजर्व की टीम लगातार नजर बनाए हुए है। आबादी में जाने से रोकने के लिए वन विभाग की टीम लगातार पटाखे छोड़ने और धुआं करने के साथ, ढोल आदि बजा रही है। इनमें से एक हाथी ने यहां गुरुवार को एक किसान को पटक-पटक कर मौत के घाट उतार दिया था।
दो नेपाली हाथी बृहस्पतिवार सुबह लखीमपुर थाना गांव के जंगल में पहुंच गए थे। इनमें से एक हाथी ने किसान लाखन सिंह को भी पटक-पटककर मार डाला था। जिसके बाद बरेली से लेकर लखनऊ तक खलबली मच गई थी। कंजरवेटर पीपी सिंह टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे। दोपहर तक हाथियों को वापस उत्तराखंड के जंगल में भेजने के लिए मशक्कत की गई थी, लेकिन जब सारी कवायद फेल साबित हुई तो लखनऊ से वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया और पीलीभीत टाइगर रिजर्व की टीम बहेड़ी पहुंचीं। टीम ने शाम होते ही अपना काम शुरू किया, लेकिन दोनों नेपाली हाथी दो किलोमीटर के दायरे में घूमते रहे। शुक्रवार सुबह परोही, मंडनपुर से हाईवे पार कर वे डंडिया गांव होते हुए मनुआपट्टी गांव के रास्ते उत्तराखंड के सीमा स्थित हाजापुर गांव पहुंचे। वहां ग्रामीणों ने पीपे, बर्तन आदि बजाए तो वापस बहेड़ी के गांव मनुआपट्टी का रुख कर लिया। दिन भर वहीं जंगल में रहे। देर शाम को रामपुर के बार्डर के जंगल में पहुंच गए। वन विभाग की टीम हाथियों को आबादी से बचाकर उत्तराखंड के चोरगलिया के जंगल में ले जाने के लिए पूरे प्रयास कर रही है। टीम का कहना है कि दोनों हाथी नर हैं। हाथी का तेज मूवमेंट ज्यादातर रात में होता है। वह लगातार उनकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं।
चोरगलिया के जंगल पहुंचाने की रणनीति तैयार
कंजरवेटर पीपी सिंह ने बताया कि उत्तराखंड वन विभाग के अधिकारियों से बात हो चुकी है। यूपी की टीमें हाथियों को पटाखे और धुआं करके आबादी से बचाते हुए सीधे उत्तराखंड में दाखिल कराएंगी। उत्तराखंड की टीम वहां से चोरगलिया के जंगल में ले जाने का रास्ता बनाएगी। दोनों नर हाथियों को सुरक्षित जंगल तक पहुंचाना है, इसके लिए टीमें लगा दी गई है। वह खुद भी लगातार टीमों और डीएफओ के संपर्क में हैं।