बरेली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अगले सप्ताह बरेली आ रहे हैं। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तो शुरू हो गई हैं, लेकिन अफसरों की नींद भी उड़ी हुई है। सूत्रों के मुताबिक इस बार मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में कलक्ट्रेट और अभिलेखागार जाना भी शामिल है। ऐसे में कहीं मुख्यमंत्री ने खुरची गईं खतौनियों के बाबत पूछ लिया या अभिलेख मांग लिए तो सारा ‘खेल’ सामने आ जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो कई का नपना भी तय है। ये सोचकर अफसरों में खलबली मची हुई है।
शासन कामकाज में मनमानी करने वाले और भ्रष्ट अफसरों पर शिकंजा कस रहा है। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ बरेली मंडल की समीक्षा करने आए थे, लेकिन लापरवाह अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। इसलिए ‘सिस्टम’ लापरवाह होता चला गया। प्रदेश में ज्यादातर जिलों में सत्तापक्ष और अफसरों से टकराव नहीं बात नहीं है। बरेली में भी नगर निगम समेत विभिन्न विभागों में टकराव की ही स्थिति बनी हुई है। बिना रिश्वतखोरी के काम नहीं हो रहा है, भू-माफिया सिस्टम पर हावी हैं। अभिलेखों में हेराफेरी आम हो गई है। खतौनियां खुरच कर किसी की जमीन दूसरे के नाम कर देने के कई मामले भी सामने आ चुके हैं। विकास कार्य रेंग रहे हैं। जनता और पोर्टल माध्यम से आने वाले मामले निस्तारित नहीं हो रहे हैं। इससे रेटिंग में बरेली 71 वें स्थान पर पहुंच गया है। अगर सीएम सड़क मार्ग से बरेली आए तो लखनऊ फोरलेन पर हुई मनमानी सबसे पहले सामने आएगी। इसलिए सीएम के आने सुगबुगाहट से अफसरों के रंग उड़ना शुरू हो गए हैं और वे सत्तापक्ष नेताओं ने तालमेल बनाने में जुट गए हैं।