बरेली। महंगे दाम पर खाद्य पदार्थ खरीदकर अगर आप सोचते हैं कि ये शुद्ध होगा तो इसकी कोई गारंटी नहीं है। इसका खुलासा बुधवार दोपहर बाद सुभाषनगर क्षेत्र में मोबाइल लैब पर दूध सैंपल की जांच के दौरान हुआ। साठ रुपये प्रति लीटर के भाव से खरीदे गए दूध में यूरिया की मिलावट पाई गई, जबकि 40 रुपये प्रति लीटर वाला दूध जांच में पास हो गया। फरीदपुर में भी महंगा वाला दूध जांच में फेल हो गया। इससे इस बात की भी पुष्टि होती है कि धंधेबाज खाद्य पदार्थों की ज्यादा कीमत ये कहकर वसूलते हैं कि महंगा है, लेकिन शुद्ध है। जबकि हकीकत इसके उलट है। सफेद दूध का काला कारोबार पूरी प्लानिंग से किया जा रहा है।
दूसरे दिन एफएसडीए मोबाइल लैब ने फरीदपुर और सुभाषनगर क्षेत्र में खाद्य पदार्थ, दूध, खोया आदि के नमूने मौके पर चेक कर उसकी रिपोर्ट उपभोक्ताओं बताई। फरीदपुर में व्यापारी और ग्राहक दूध और खोया जांच कराने पहुंचे। यहां दूध मिलावटी पाया गया। दोपहर बाद लैब बड़ोदा बैंक के पास सुभाषनगर क्षेत्र पहुंची। वहां लोग पहले से ही मोबाइल लैब का इंतजार कर रहे थे। ज्यादातर लोग दूध और घी लेकर आए थे। एक उपभोक्ता दूध लेकर पहुंचा। जांच में यूरिया की पुष्टि हुई। मतलब साफ है कि दूध मिलावटी नहीं बल्कि सिंथेटिक था। दूध के चार नमूने इस्तेमाल करने योग्य नहीं पाए गए। सिंथेटिक दूध की बात सामने आते ही संबंधित उपभोक्ता चौंक गया। बोला वो तो सबसे महंगा वाला दूध और उससे बने उत्पाद खरीदता है.. फिर भी सिंथेटिक। जिन दूध के सैंपलों में यूरिया की पुष्टि हुई, उनके उपभोक्ताओं ने बताया कि यह दूध 60 रुपये खरीदा है। जबकि 40-50 रुपये लीटर वाला दूध पास हो गया। दोनों स्थानों पर टेस्टिंग में ज्यादा समय बीत जाने पर लैब बदायूं रवाना हो गई।
जिला अभिहित अधिकारी डीआर मिश्रा ने बताया कि दो दिन में एफएसडीए लैब पर 97 उपभोक्ता, व्यापारी और उत्पादक नमूने चेक कराने पहुंचे। उन्होंने बताया कि मिलावट के खिलाफ जागरूकता अभियान जारी रहेगा। कोई उपभोक्ता अथवा व्यापारी एफएसडीए कार्यालय से संपर्क कर निर्धारित शुल्क भुगतान कर अपने सैंपल चेक करा सकता है। मोबाइल लैब पर बिना किसी शुल्क के ही सैंपल चेक हुए।