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योगी जी! साहब आपकी नहीं सुनते तो जनता की क्या सुनेंगे

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बरेली। लोकसभा चुनाव संपन्न होते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने जनता से सीधे संवाद करने और उनकी समस्याएं समयबद्ध निस्तारण कराने को फैसला लिया है। इसके तहत ही उनके प्रमुख सचिव एसपी गोयल ने पिछले सप्ताह एक आदेश जारी कर कहा कि संबंधित अफसर कैंप कार्यालयों से कार्य निस्तारण की संस्कृति त्याग दें, मुख्य कार्यालय में हर दिन सुबह नौ से 11 बजे तक अफसर जनसमस्याएं सुनेंगे। अन्य सभी विभागीय कार्य भी मुख्य कार्यालयों में होंगे, कैंप कार्यालय से फाइलों का निस्तारण नहीं होगा। अभी तक इस आदेश का पालन तक करना दूर बल्कि सभी फाइलें कैंप कार्यालयों से ही निपटाई जा रही हैं।
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मुख्यमंत्री कार्यालय से एक सप्ताह पहले आए आदेश हवा में कहीं गुम हो गया। इस पर मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडे ने भी संबंधित अफसरों को सुबह नौ बजे से दो घंटे तक कार्यालयों में बैठने के निर्देश दिए हैं। यह पत्र भी अभी कार्यालयों में इधर-उधर दौड़ रहा है। उन्होंने पत्र में कहा है कि सभी मंडलायुक्त, एडीजी, आईजी, डीआईजी, डीएम, एसएसपी, एसपी हर दिन अपने मुख्य कार्यालयों में सुबह नौ से 11 बजे तक मौजूद रहकर जनसमस्याएं सुन कर उनका समयबद्ध निस्तारण भी कराएंगे। पत्र में कहा गया है कि संबंधित कुछ अफसर इस व्यवस्था की अनदेखी कर रहे हैं। आवास/ कैंप कार्यालयों से कई अफसर सुबह 11 बजे तक निकलते तक नहीं है। कैंप कार्यालयों से ही फाइलें निपटाई जा रही हैं। यह जानकारी मुख्यमंत्री के संज्ञान में आ चुका है, इसलिए इसका कड़ाई से पालन जरूरी है। अन्यथा प्रतिकूल संज्ञान लिया जाएगा। अपनी ओर पत्र जारी कर दिया। इस पत्र भी कुछ अफसरों ने संज्ञान तक नहीं लिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय में जानकारी पहुंची है कि सिर्फ बदायूं जिला में इस व्यवस्था का पालन हो रहा है। शाहजहांपुर और पीलीभीत जिला में भी लंबित जनसमस्याएं समयबद्ध निस्तारित नहीं हो रही हैं।

भू-माफिया चिह्नीकरण समीक्षा बैठकों में नहीं पहुंचते अफसर
सीएम एंटी भू- माफिया अभियान भी दो सालों से चलवा कर हैं, लेकिन इसमें भी मंडल में कोई खास उपलब्धि नहीं हो पाई है। डीएम वीके सिंह ने रविवार अवकाश में लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम व गुंडा अधिनियम पर प्रभावी कार्रवाई के लिए समीक्षा बैठक बुलाई। नगर निगम, नहर, सिंचाई आदि विभागों से कोई अधिकारी पहुंचा ही नहीं। जो अफसर बैठक में पहुंचे वे अपनी सूची में सबसे ऊपर किसी न किसी किसान का नाम लिखकर लाए। जबकि नगर निगम क्षेत्र में 99 लोगों ने दस हैक्टयर से ज्यादा भूमि पर कब्जा कर रखा है। सिंचाई विभाग तो इससे आगे है, उसकी मिलीभगत से कई आलीशान कालोनी, आवास नहर और नदी की जमीनों पर बन चुके हैं। सिंचाई विभाग रिकार्ड अनुसार 3.35 हैक्टयर भूमि पर 17 प्रमुख भू- माफियाओं का कब्जा है। डीएम ने समीक्षा में पाया कि पीलीभीत बाईपास समेत विभिन्न स्थानों पर हुए कब्जे साफ करने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई तक नहीं की है। लोक निर्माण विभाग ने 165 कब्जेदारों पर कानूनी कार्रवाई तक करना उचित नहीं समझा। डीएम ने स्थानीय निकाय क्षेत्र में हुए कब्जों पर नाराजगी जताई। करीब दस हैक्टयर जमीन पर 149 अतिक्रमण हैं। डीएम ने बैठक में गैर हाजिर नगर निगम, सिंचाई और नहर विभाग से कोई प्रतिनिधित्व नहीं होने पर जवाब तलब किया है। साथ ही सरकारी भूमि पर हुए कब्जों का फिर से चिन्हाकन करने और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
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