बाजार में छाने से पहले ही कम दिखने लगी लीची
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बरेली। इस बार सीजन में लीची बाजार में छाने से पहले ही गायब होने लगी है। दो माह से ज्यादा अवधि तक मंडी में इसकी आमद होती है, लेकिन बार उत्पादन कम होने और सोशल मीडिया में वायरल हो रहे वीडियो के चलते भी इसकी मांग में गिरावट आई है।
हर वर्ष मई में लीची बाजार में आना शुरू हो जाती है। इसका सीजन बारिश होने तक यानी जुलाई के प्रथम सप्ताह तक बमुश्किल चलता है। इस सीजन में लीची की आमद मंडी में कम होने के कारण इसके भाव में 40 फीसदी तक उछाल है। सीजन पूरा होने से पहले ही सोशल मीडिया में वायरल हो रहे वीडियो ने उपभोक्ताओं में खलबली मचा दी है, जिसके कारण बाजार भी प्रभावित होने लगा है। व्हाट्सएप पर चल रहे लीची से बीमारी होने के वीडियो ने इसकी मांग घटा दी है।
बरेली मंडी में हर दिन 700 क्विंटल से अधिक लीची का कारोबार होता है। थोक कारोबारी सुभान खान बताते हैं कि पिछले साल जो लीची 30 रुपये प्रति किलो थी, इस साल 50 रुपये प्रति किलो बिक रही है। सीजन की शुरूआत में रिटेल मंडी में लीची 125 रुपये प्रति किलो बिकी थी। मौजूदा समय में 70-80 रुपये प्रतिकिलो बिक रही है।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों से व्हाट्सएप पर वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक विशेष कीड़ा रेंगता हुआ दिख रहा है। इससे लीची उपभोक्ताओं में दहशत का माहौल पैदा हो गया है, जिससे मांग घट गई है। हालांकि अब लीची का सीजन जाने को है, बमुश्किल दो सप्ताह ही बचे हैं। बारिश के बाद यह खाने योग्य नहीं रहती। क्योंकि इसमें कीड़े पनपने लगते हैं।
कारोबारी शुजा उर रहमान ने बताया कि लीची मुजफ्फरपुर (बिहार), झारखंड, उत्तराखंड आदि स्थानों से आती है। मुजफ्फरपुर में पैदा हो रही लीची कुछ खराब बताई जा रही है। वायरल हो रहे वीडियो में भी इसका कनेक्शन बच्चों की हो रही मौत से जोड़ा जा रहा है। देहरादून और आसपास से आने वाली लीची की मांग इस क्षेत्र में ज्यादा होती है।