बरेली/लखनऊ। जिला अस्पताल में इलाज में टालमटोल के कारण पांच दिन की नवजात बच्ची की मौत हो गई। शासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कमलेंद्र स्वरूप गुप्ता को निलंबित कर दिया है, जबकि जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अलका शर्मा के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के आदेश दिए हैं। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर की गई है।
विशारतगंज क्षेत्र के गोकिलपुर निवासी सुरेंद्रपाल बुधवार को पांच दिन की बच्ची उर्वशी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे थे। बच्ची के प्रीमेच्योर होने के कारण उसकी दशा गंभीर थी। जिला अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद डा. एसएस चौहान ने बच्ची को देखा, लेकिन उसे बिना भर्ती व उपचार किए जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड के लिए रेफर कर दिया। सुरेंद्रपाल जब बच्ची को लेकर महिला अस्पताल पहुंचे तो वहां मौजूद डा. सौरभ ने रेडिएंट वार्मर एवं फोटो थेरेपी बेड उपलब्ध न होने का हवाला देकर वापस जिला अस्पताल की इमरजेंसी के लिए रेफर कर दिया।
करीब तीन घंटे तक सुरेंद्रपाल बच्ची को गोद में लेकर भटकते रहे। उन्होंने दोनों अस्पतालों के डॉक्टरों से बच्ची के इलाज की भीख मांगी, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। आखिरकार बच्ची की मौत हो गई। इस मामले में देर रात जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. कमलेंद्र स्वरूप गुप्ता को शासन ने निलंबित कर दिया। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि इस मामले की जानकारी होने पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिला अस्पताल के सीएमएस को निलंबित करने और महिला चिकित्सालय की सीएमएस डा. अलका शर्मा के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
डीएम ने चार डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की भेजी रिपोर्ट
डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह के निर्देश पर एडीएम सिटी महेंद्र कुमार ने देर रात तक मामले की जांच की और डॉक्टरों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए। उनकी रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने दोषी डॉ. केएस गुप्ता, डॉ. अलका शर्मा , डॉ. सौरभ और डॉक्टर एसएस चौहान पर विभागीय कार्रवाई करने के लिए प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी को रिपोर्ट भेज दी।