बरेली। मलेरिया और फैल्सीपेरम मलेरिया के दृष्टिगत बरेली मंडल के चारों जिलों को अति संवेदनशील घोषित किया गया है। इन जिलों में मच्छर जनित इस बीमारी की रोकथाम को डीडीटी के छिड़काव के साथ स्पेशल मच्छरदानी यानी लांगलास्टिक इनसेक्टिस्साइड्स नेट्स बांटी जाने और हर जिले से मलेरिया प्रभावित रहे दो गांवों को पायलट प्रोजेक्ट में शामिल करने के भी आदेश हैं, लेकिन मंडल के सर्वाधिक प्रभावित बरेली के लिए जिस तरह से स्वास्थ्य विभाग कवायद कर रहा है उससे मलेरिया की रोकथाम यहां दूर की कौड़ी ही साबित होगा। वजह यह है कि जिले से सात लाख स्पेशल मच्छरदानी की डिमांड भेजे जाने के बावजूद कुल 485 मच्छरदानी ही प्रभावित इलाकों में बांटे जाने के लिए उपलब्ध कराई गई है।
जिले के मझगवां, भमौरा, रामनगर, फरीदपुर और क्यारा ब्लाक में फैंसीपेरम मलेरिया व मलेरिया का प्रकोप पहले भी रहा है और अब भी इन ब्लाकों में सबसे अधिक केस मिल रहे हैं। इसे के चलते जिले के इन सभी पांच विकास खंडों को अति संवेदनशील घोषित कर मलेरिया विभाग वहां खून की जांच से लेकर डीडीटी छिड़काव आदि का काम कर रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी डीआर सिंह ने बताया कि जिले के मलेरिया प्रभावित क्षेत्र में मच्छरदानी वितरण के लिए सात लाख मच्छरदानी की डिमांड भेजी गई थी, लेकिन शासन से मात्र 485 स्पेशल मच्छरदानी ही मिल सकी है। उन्होंने बताया कि शासन के निर्देश पर अब हर जिले के सर्वाधिक दो गांवों को इसके लिए पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में शामिल किया जाना है। इसके तहत जिले के ब्लाक मझगवां के लोहारी और भमौरा के मलगवां गांव को चुना गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि जिले में मलेरिया के प्रभावित इलाके को देख वितरण को मिली मच्छरदानियों की संख्या काफी कम है। एक परिवार को दो मच्छरदानी दी जानी है। मच्छरदानी की कम संख्या को देखते हुए सबसे पहले जनवरी से अब तक जिले में मिले फैल्सीपेरम के मरीजों के 132 परिवार में दो-दो स्पेशल मच्छर दी जाएंगी।
आपकी मच्छरदानी को भी विभाग बनाएगा स्पेशल
जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि विभाग की ओर से भेजी गई मच्छरदानियों की संख्या काफी कम है। लिहाजा शासन ने ग्रामीणों के पास पहले से मौजूद मच्छरदानियों को डेल्टा मैथरिन कीटनाशक के .02 प्रतिशत से तैयार पानी में डुबो कर उन्हें भी स्पेशल बनाकर ग्रामीणों को सौपने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की इस दी गई मच्छरदानी को तैयार कीटनाशक में डुबोने के बाद उसे छाए में सुखाया जाएगा। जिसके बाद वह स्पेशल मच्छरदानी बन जाएगी।
मच्छरदानी ऐसी करती है काम
जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि कीटनाशक युक्त इस मच्छरदानी पर जैसे ही मच्छर बैठेगा वैसे ही उसकी त्वचा के सहारे कीटनाशक उसके शरीर में पहुंच जाएगा। इसके साथ ही मच्छर के शरीर में मौजूद पैरासाइट्स निष्क्रिय हो जाएगा। तंत्रिकातंत्र भी धीरे-धीरे काम करना बंद कर देंगे और तीन से चार दिन के भीतर मच्छर की स्वत: मौत हो जाएगी।