बरेली। जिस वार्ड में पूजा भर्ती थी, उसे रात में बंद कर दिया जाता है। वहां स्टाफ नर्स के साथ गार्ड भी तैनात रहता है। कई दिन से पूजा का व्यवहार असामान्य होने और सीएमएस के निगरानी करने के आदेश के बाद भी स्टाफ की लापरवाही का यह हाल रहा कि छत के गेट में ताला तक नहीं लगाया गया। घटना के बाद जरूर ताला लगा दिया गया। सीएमएस ने भी मानसिक रूप से बीमार पूजा को मनोचिकित्सक को दिखाने के बजाय फिजीशियन को दिखाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली।
पूजा की मौत के बाद महिला अस्पताल प्रशासन अपनी खामियां छुपाने में जुटा हुआ है। पहली मंजिल के जिस वार्ड नंबर एक में पूजा भर्ती थी, वहां सिर्फ उसकी बूढ़ी सास ही हादसे की रात उसके साथ थी। ग्राउंड फ्लोर पर गार्ड पुष्पा ड्यूटी पर थी। वार्ड में स्वीपर सोनी और स्टाफ नर्स तारा मैसी तैनात थीं। वार्ड से निकलकर कोई मरीज रात में बाहर न जा सके, इसके लिए सीढ़ियों वाले गेट पर भी 24 घंटे गार्ड तैनात रहता है जहां गार्ड पुनीत की तैनाती थी। आमतौर पर दिन में किसी के आने-जाने पर गार्ड कई सवाल करता है। रात में यह गेट अक्सर बंद रखा जाता है। ड्यूटी पर तैनात स्टाफ को पता था कि पूजा मानसिक रूप से बीमार है, लेकिन इसके बाद भी उसे वार्ड से बाहर निकलते समय क्यों नहीं रोका गया, यह बड़ा सवाल है।
तीसरे मंजिल की छत पर जाने वाले गेट में हादसे की रात ताला क्यों नहीं था, इसका भी कोई साफ जवाब नहीं है। अस्पताल प्रशासन की सफाई है कि गेट के कब्जे ढ़ीले हो गए थे। उसे शनिवार को ही रिपेयर कराया गया था। सीमेंट पूरी तरह सूखा नहीं था, इसी कारण स्टाफ ने गेट बंद कर कुंडी लगा दी थी। सवाल है कि जब कुंडी लगा दी गई थी तो ताला डालने में क्या दिक्कत थी।
हर बच्चा देखकर कहती थी- मेरा बच्चा है
पूजा के असामान्य व्यवहार से दूसरी महिला मरीज परेशान थीं। उन्हें भय था कि कहीं पूजा उनका बच्चा न उठा ले जाए। पूजा उन्हें जब अपने बच्चे को दूध पिलाता देखती थी तो कहती थी यह मेरा बच्चा है, मुझे दो। वार्ड में भर्ती मुशर्रत जहां ने बताया कि अपने बच्चे की मौत के बाद पूजा पति से झगड़ा करती थी। कुछ देने पर खाती नहीं थी। कहती थी सब मर जाएंगे। डर के मारे नींद तक नहीं आती थी। महनाज ने बताया कि तीन दिन पहले पूजा उसके बेड के पास आकर उसके बच्चे को निहारने लगी। कहने लगी कि उसका बच्चा है। रविवार को ड्यूटी पर तैनात गार्ड निर्दोष पटेल और स्वीपर शालिनी ने बताया कि पूजा पूरी रात सोती नहीं थी। तीन दिन पहले दिन में ही वह गेट से बाहर जाने का प्रयास कर रही थी। उसे रोका तो वह फर्श पर सिर पटक-पटक कर रोने लगी।