बरेली। राशन की कालाबाजारी को रोकने के लिए शासन ने करीब दो साल पहले कार्डों को आधार से लिंक करने के आदेश दिए थे। जबकि पूर्ति विभाग के अफसरों की लापरवाही से मंडल में अभी भी लाखों राशन कार्डों को आधार से नहीं जोड़ा जा सका है। इसमें सरकारी राशन वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के सिस्टम को भी झटका लग रहा है।
राशन कार्ड के आधार से लिंक न होने में बड़ी फर्जीवाड़ा यह हो रहा है कि पूर्ति विभाग और कोटेदार मिलकर बड़ी संख्या में फर्जी कार्ड बनवा लेते हैं। इनके नाम पर हर माह सरकारी गोदामों से राशन तो मिलता हैं लेकिन उसका वितरण कागजों पर ही दिखाकर राशन की कालाबाजारी कर देते हैं। घपले के इस खेल को रोकने के लिए शासन ने वर्ष 2017 में सभी राशन कार्डों को आधार से जोड़ने के लिए निर्देश दिए गए थे, जबकि पूर्ति विभाग के अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।अकेले बरेली जिले में ही करीब पौने चार लाख उपभोक्ताओं को आधार कार्ड से लिंक नहीं किया जा सका है। इसके पीछे वजह यह भी है कि करप्शन में डूबे विभाग के तमाम अफसर खुद नहीं चाहते हैं कि व्यवस्था में सुधार हो ताकि उनकी कमाई बंद हो जाए। हालांकि अफसरों का कहना है कि आधार सीडिंग के लिए जिन निजी एजेंसियों को काम दिया गया था, उन्होंने इसे समय से पूरा करने में तेजी नहीं दिखाई। ऐसे में पीलीभीत, बदायूं में निजी एजेंसियों को बदलना तक पड़ा।
राशनकार्डों को आधार से सीडिंग का काम तेजी से हो रहा है। करीब 88 फीसदी काम पूरा भी हो चुका है। कोशिश की जा रही है कि जल्द से जल्द इसे पूरा कर लिया जाए। -सीमा त्रिपाठी, डीएसओ/ प्रभारी खाद्य उपायुक्त
जिला कार्ड संख्या सदस्यों की संख्या आधार से लिंक होेने से बाकी सदस्य
बरेली अंत्योदय 99529 98199 58602
- पात्र गृहस्थी 705095 700732 316838
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पीलीभीत अंत्योदय 36652 135491 23627
- पात्र गृहस्थी 349956 1511380 203384
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बदायूं अंत्योदय 45221 140868 28239
- पात्र गृहस्थी 476166 1886011 232020
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शाहजहांपुर अंत्योदय 37841 108439 16984
- पात्र गृहस्थी 522767 1838800 213958
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