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अब दादी-चाची के हाथों की सिली यूनिफार्म पहनेंगे बच्चे

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बरेली। नए सत्र से बेसिक स्कूलों के बच्चे निजी एजेंसियों के बजाए चाची-दादी की उम्र की महिलाओं के हाथों की सिली यूनिफार्म पहनेंगेे। इस बार यूनिफार्म तैयार करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की महिलाओं को दी जाएगी। शासन ने कार्ययोजना तैयार करने की जिम्मेदारी प्रशासन को दी है।
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बीएसए तनुजा त्रिपाठी के मुताबिक समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए यह निर्णय शासन स्तर पर लिया गया है। पिछले दिनों आचार संहिता लागू होने से पहले, मिशन डायरेक्टर ने इस संबंध में निर्देश जारी किया था। उसी क्रम में यह जिम्मेदारी समूह की महिलाओं को दी जाएगी। महिलाओं को प्राथमिक स्तर पर करीब दो लाख यूनिफार्म तैयार करने का लक्ष्य दिया जाएगा। इसके लिए करीब 70-80 एक्टिव समूह की महिलाओं को प्रशिक्षित भी किया जाएगा। प्रत्येक यूनिफार्म पर महिलाओं को लगभग 50-60 रुपये बचत होने की उम्मीद है।

बच्चों को मिलती हैं दो यूनिफार्म
बेसिक स्कूलों में पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे को साल में दो यूनिफार्म देने का प्रावधान है। पहले एक यूनिफार्म के लिए शासन ने 200 रुपये निर्धारित किया था, लेकिन इस बार 300 रुपया तय किया गया है। जल्द ही इस संबंध में होने वाली बैठक में बीएसए और सभी खंड शिक्षाधिकारी शामिल होंगे। किस स्कूल में कितनी यूनिफार्म की जरूरत है, कौन सा समूह किस स्कूल में यूनिफार्म मुहैया कराएगा समेत अन्य बिंदुओं पर निर्णय होगा।
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एक्टिव समूह का होगा चयन
अधिकारियों के मुताबिक यूनिफार्म सिलने के लिए जिले में एक्टिव समूहों का चयन किया जाएगा। समूह की महिलाओं को उन्हीं की ग्राम पंचायतों अथवा पास की ग्राम पंचायतों के स्कूलों में यूनिफार्म मुहैया कराने की जिम्मेदारी दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर महिला दर्जियों क ा सहयोग भी लिया जा सकता है।
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