बरेली। टैक्सी वे के लिए एयरफोर्स से लीज पर ली गई जमीन का खसरा नंबर बदलने के मामले में अभी कोई हल नहीं निकल पाया कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एएआई ने जमीन कम करने का प्रस्ताव रक्षा संपदा विभाग को भेज दिया है। इस प्रस्ताव में एएआई ने टैक्सी वे के लिए अब करीब एक एकड़ कम भूमि की जरूरत बताते हुए उसे कम करने और उसी के अनुसार लीज रेंट भी कम करने को कहा है। रक्षा संपदा विभाग ने प्रस्ताव में इस संशोधन पर आपत्ति जताते हुए इससे पहले दी गई सैद्धांतिक अनुमति निरस्त होने की आशंका जताई है।
बरेली हवाई अड्डे से तमाम दावों के बावजूद उड़ान शुरू नहीं हो पाई है और अब इसमें नया पेच फंसता नजर आ रहा है। एएआई के संयुक्त महाप्रबंधक राजीव कुलश्रेष्ठ के मुताबिक हवाई अड्डे पर टैक्सी वे के लिए सिर्फ 195 मीटर लंबा और 54 मीटर चौड़े ट्रैक की जरूरत है। यही माप घरेलू उड़ान के लिए इस्तेमाल होने वाले हवाई जहाज के बराबर है। ऐसे मेंहवाई जहाज के विंग्स के साइज में ही टैक्सी-वे बनाया जा रहा है जिसके लिए सिर्फ 2.69 एकड़ जमीन प्रर्याप्त है। हालांकि इससे पहले टैक्सी वे के लिए 3.62 एकड़ भूमि स्वीकृत हो चुकी है। रक्षा विभाग की इस भूमि की पांच साल की लीज का एक करोड़ रुपये के रेंट का भुगतान किया जाना है। अब एएआई संशोधित प्रस्ताव में 0.93 एकड़ जमीन कम करने के साथ उसी के अनुसार लीज रेंट भी कम करने को कह रहा है। सूत्रों के मुताबिक जमीन कम होने से रेट संशोधित होने पर एएआई को करीब 27.62 लाख रुपये की बचत होगी।
खसरा नंबर बदलने से फंसा पेंच
सूत्रों के मुताबिक वर्क ऑर्डर मिलने के बाद टैक्सी-वे के लिए चयनित भूमि पर औपचारिक अनुमति के लिए रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखा गया था। खसरा नंबर का मिलान न होने पर मंत्रालय ने अनुमति पर आपत्ति करते हुए एएआई, एयरफोर्स स्टेशन और डीईओ को संशोधित रिपोर्ट भेजने को कहा था। आपत्ति के बाद खसरा नंबर का मिलान किया गया तो करीब 0.93 एकड़ जमीन अतिरिक्त मिली। इसके बाद ही एएआई ने डीईओ को पत्र लिखकर संशोधित अनुमति पत्र में जमीन के साथ उसका लीज रेंट भी कम करने को कहा है। बताते हैं कि डीईओ ने इससे पहले सिर्फ खसरा नंबर संशोधित कर अनुमति के लिए पत्र भेजा है, जिसमें एएआई की नई मांग शामिल नहीं है। अब एएआई के नए पेच से बरेली से हवाई उड़ान पर नया ग्रहण लगने की आशंका जताई जा रही है।
टैक्सी वे के लिए सिर्फ 2.69 एकड़ जमीन की जरूरत है। अतिरिक्त भूमि की जरूरत नहीं है। इसलिए रक्षा संपदा विभाग से अतिरिक्त भूमि समेत उसी के अनुसार लीज रेंट कम करने को पत्र लिखा है।
- राजीव कुलश्रेष्ठ, संयुक्त महाप्रबंधक, एएआई