बरेली। शाही में पात्रों को चक्कर कटवाने और अपात्रों को राशन कार्ड दे दिए जाने के प्रकरण भी अजीब गफलत में फंस गई है। एक तरफ राशन कार्ड के लिए लोगों को सीएम कार्यालय और हाईकोर्ट तक जाकर फरियाद करनी पड़ रही है, दूसरी तरफ एसडीएम के जांच के आदेश उनके दफ्तर से ही बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। एसडीएम मीरगंज की ओर से मंगलवार को इस मामले में जांच का आदेश जारी किया था। आदेश के मुताबिक शाही के लेखपाल को घर-घर जाकर राशन कार्ड से वंचित लोगों को चिह्नित करना था और यह पता लगाना था कि उनके राशन कार्ड क्यों नहीं बन पाए जबकि नगर पंचायतों राशन कार्डों को अद्यतन स्थिति पर रिपोर्ट देनी थी। एसडीएम का यह आदेश शाही नगर पंचायत के अलावा मीरगंज तहसील की किसी नगर पंचायत में नहीं पहुंचा। लेखपाल ने भी बुधवार को एसडीएम का आदेश मिलने से इनकार कर दिया था।
लतीफ मियां की मौत के अमर उजाला ने पड़ताल की तो पता चला कि उनके जैसे सैकड़ों ऐसे लोग हैं जो राशन कार्ड के लिए लंबे समय से नगर पंचायत और तहसील में पूर्ति कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। हालात किस हद तक खराब हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग राशन कार्ड के लिए सीएम कार्यालय और हाईकोर्ट तक का दरवाजा खटखटा चुके हैं। हाल ही में हाईकोर्ट ने एक रिट पर पात्र लोगों को राशन कार्ड जारी करने का भी आदेश दिया था, यह अलग बात है कि इस पर भी कार्रवाई होनी अभी बाकी है। राशन कार्ड की जिम्मेदारी से जुड़े पूरे सिस्टम में तमाम खामियां उजागर होने के बाद अब मामले को मैनेज करने की भी कोशिशें की जा रही हैं। इसी के चलते बुधवार को एसडीएम मीरगंज रोहित यादव ने जांच का आदेश देते हुए एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन बृहस्पतिवार की शाम तक शाही के अलावा किसी और नगर पंचायत के ईओ को यह आदेश प्राप्त ही नहीं हुआ था। सप्लाई इंस्पेक्टर अवधेंद्र सिंह का कहना था कि बृहस्पतिवार को कमिश्नर के दौरे की वजह से फतेहगंज पश्चिमी और शीशगढ़ नगर पंचायत को यह आदेश नहीं भेजा जा सका। आदेश कार्यालय में रखे हैं और शुक्रवार को दोनों नगर पंचायतों को रिसीव करा दिए जाएंगे।