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बारिश का पानी अंडरपास में भरा तो कैसे निकालेंगे

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बरेली। आईवीआरआई ओवरब्रिज के बाद अब अंडरपास बनाने में भी रेलवे अफसरों की लापरवाही सामने आई है। ढाई करोड़ के इस प्रोजेेक्ट में ड्रेनेज सिस्टम की सटीक प्लानिंग ही नहीं की गई है। ऐसे में अगर बारिश का पानी अंडरपास में भरता है तो उसे निकालना मुश्किल सिरदर्द बनेगा।
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रेलवे के अधिकारियों ने आईवीआरआई क्रासिंग पर ओवरब्रिज का प्रोजेक्ट को गंभीरता से नहीं किया। साल भर से काम लटका हुआ है। पब्लिक को आईवीआरआई से नैनीताल रोड पर आने-जाने में परेशानी झेलनी पड़ रही है। कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने करीब दो माह पहले रेलवे के अधिकारियों को बुलाकर कड़े निर्देश दिए थे कि पुल नहीं बना पा रहे तो अंडरपास ही बना लोग। इसके बाद रेलवे ने करीब डेढ़ करोड़ से अंडरपास बनाने का टेंडर निजी कंपनी को दे दिया। इस रकम से ट्रैफिक के एक तरफ आने और दूसरी ओर जाने के लिए 200-200 मीटर के दो अंडरपास बनाए जा रहे हैं। 25 अप्रैल से अंडरपास बनना शुरू हो गए थे। रेलवे अस्पताल की तरफ अंडरपास की सीसी रोड बन चुकी है। रिटेनिंग वाल का काम भी चल रहा है। इधर स्टेशन की तरफ भी अंडरपास की सड़क बननी शुरू हो गई है। 15 जुलाई तक काम पूरा करने का लक्ष्य। रेलवे 70 फीसदी काम पूरा हो जाने का दावा भी कर रहा है। लेकिन अब तक ड्रेनेज की कोई समुचित व्यवस्था तैयार नहीं की गई है। इस अंडरपास की अधिकतम गहराई चार मीटर तक है। उसके और नीचे ड्रेनेज बनेगा। जबकि रेलवे कालोनी में ड्रेनेज ढाई से तीन मीटर ही गहरा है। अगर अंडरपास के ड्रेनेज को इससे कनेक्ट करने की कोशिश भी होगी तो पानी उल्टा अंडरपास में ही भरेगा। सूत्र बताते हैं कि इस अंडरपास ड्रेनेज सिस्टम शामिल ही नहीं किया गया। जाहिर है कि इसमें बारिश का पानी भरना तय है।

अंडरपास के खुले हिस्से को ढकने के लिए लगेगी फाइबर शीट
क्रासिंग के दोनों ओर अंडरपास के खुले हिस्से को ढकने के लिए उसे फाइबर शीट लगाई जाएगी, ताकि उसके नीचे से गुजरने वाले लोगों को बारिश और धूप से बचाया जा सके। इसके अलावा नैनीताल रोड पर अंडरपास का हिस्सा भी रेलवे अपनी जमीन पर भी बनेगा।
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