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छह वर्षों बाद शुभ संयोग में मनायी जाएगी निर्जला एकादशी

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बरेली। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी ‘निर्जला एकादशी’ अबकी बार बेहद शुभ रहेगी। करीब छह सालों बाद गुरुवार को पड़ रही निर्जला एकादशी को ज्योतिषाचार्य बेहद शुभ मान रहे हैं। उनके मुताबिक इस दिन भगवान विष्णु का विधि विधान से पूजन और व्रत करने पर श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होगी। क्योंकि गुरुवार का कारक ग्रह गुरु है। इसलिए गुरुवार के दिन एकादशी पड़ना बहुत ही श्रेष्ठ संयोग है।
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ज्योतिषाचार्य पं. नीरज शर्मा के मुताबिक निर्जला एकादशी को पांडव और भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। महाभारत काल में भीम ने इस एकादशी का व्रत किया था। इस दिन बिना पानी पिये व्रत किया जाता है। बताया कि भगवान विष्णु की सच्चे मन से पूजा की जाए तो भाग्योदय होता है। जिन जातकों की कुंडली में गुरु की स्थिति शुभ नहीं है। वे विधि विधान से पूजन कर गुरु की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

विधिवत करें मां गायत्री का पूजन
गंगा दशहरा के दूसरे दिन मां गायत्री जयंती मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक महर्षि विश्वामित्र ने पहली बार गायत्री मंत्र का जाप किया था। तभी से इसे गायत्री जयंती के रूप में मनाया जाता है। गायत्री मंत्र का पहली बार जप भोर में, दूसरी बार दोपहर में और तीसरी सूर्यास्त के बाद करना चाहिए। कष्टों से मुक्ति के लिए जातक पीपल, शमी, वट, गूलर, पाकर की टहनियां लेने के साथ एक बर्तन में कच्चा दूध भर लें। एक हजार बार गायत्री मंत्र जाप के बाद टहनियों को दूध में डुबोकर एक-एक कर अग्निकुंड में डालने से राहत मिलेगी।
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पूजन के बाद करें क्षमा याचना
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक सुबह स्नान कर पीले वस्त्र पहनकर प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा करें। भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को आसन पर विराजमान कर वस्त्रों के बाद आभूषण और फिर यज्ञोपवीत पहनाकर पुष्पमाला चढ़ाएं। तिलक कर तुलसी दल, काले तिल का भोग लगाएं औरदीपक जलाएं। भगवान को नेवैद्य अर्पित कर विष्णुजी के मंत्र का 108 बार जाप करें। संभव हो तो एकादशी व्रत कथा सुनें और आरती करें। आखिर में भगवान से पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा याचना करें।
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