बरेली। आंवला तहसील के गांव जैनपुर कादराबाद के विनीत चतुर्वेदी के पास 35 बीघा पैतृक कृषि भूमि है। यह जमीन उनके पिता श्रीकृष्ण के नाम दर्ज थी। वर्ष 2014 में पिता के देहांत के बाद उन्होंने इसकी सूचना लेखपाल को देकर खतौनी में अपना नाम दर्ज कराना चाहा लेकिन पांच साल की भागदौड़ के बाद भी वह यह काम नहीं करा सके हैं। विनीत चतुर्वेदी का कहना है कि जमीन नाम न होने से सबसे बड़ा नुकसान यह हो रहा है कि उनके खेतों में गन्ने का सर्वे नहीं हो पा रहा है। वह जमीन को अपने नाम दर्ज कराने के लिए पिता का मृत्यु प्रमाणपत्र भी दे चुके हैं। उनका कहना है कि कई साल के दौरान न जाने कितने लेखपाल आए, सभी उन्हें टकराते रहे। एसडीएम से भी शिकायत की पर कोई सुनवाई नहीं हुई। अब डीएम को दरखास्त दी है।
इसी तरह बहेड़ी के गांव भोजपुर जोगीठेर के सूरजपाल सिंह की भी दरखास्त राजस्व विभाग में दबी पड़ी है। अब उन्होंने डीएम दफ्तर में दरख्वास्त दी है जिसके मुताबिक वह मजदूरी करते हैं। चुनावी रंजिश में एक दबंग जबरदस्ती उनके खेत में तालाब खुदवा रहा है। शिकायत करने पर लेखपाल का कहना था कि उनका खेत ग्राम समाज की जमीन पर है। सूरजपाल अपनी जमीन को बचाने के लिए दौड़ लगा रहे हैं। रामपुर बाग के अभिषेक की शिकायत है कि उनकी अराजी जमीन गांव नगला तहसील फरीदपुर में है। इसकी पैमाइश अवैध तरीके से उन्हें सूचना दिए बगैर ही करा ली गई है। इस पर आपत्ति के बाद नवंबर 2017 में एसडीएम फरीदपुर ने इस निरस्त कर दिया था। विपक्षियों ने यह मामला अपर आयुक्त कोर्ट में दाखिल किया है। उन्होंने अब सीएम को लेटर भेजकर अपनी जमीन पर जालसाजी से कब्जा रोकने और तूदे हटवाने की गुहार लगाई है।