बरेली। एयर टर्मिनल टैक्सी-वे के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) और एयरफोर्स के बीच हुए करार पर खसरा संख्या बदलने से एक बार फिर संकट मंडराने लगा है। रक्षा मंत्रालय तक पहुंची जमीन अनुबंध की फाइल पर खसरा संख्या के अनुसार भूमि का रिकॉर्ड न मिलने पर स्वीकृति नहीं मिली है। मामले पर रक्षा मंत्रालय ने एएआई, डीईओ और एयरफोर्स स्टेशन को पत्र भेजकर भूमि रिकॉर्ड दुरुस्त कर दोबारा स्वीकृति के लिए फाइल मांगी है।
एयरफोर्स में टैक्सी वे निर्माण और एयरफोर्स रनवे इस्तेमाल करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने इसी साल जनवरी में सैद्धांतिक अनुमति प्रदान की है, जिसकी सैद्धांतिक अनुमति होने से एयरफोर्स परिसर की रक्षा भूमि पर टैक्सी-वे निर्माण के लिए भी वर्किंग ऑर्डर मिल गया। सूत्रों के मुताबिक सैद्धांतिक अनुमति के बाद टैक्सी-वे के लिए लीज पर दी जाने वाली संबंधित भूमि का मिलान खतौनी से किया गया तो खसरा संख्या के अनुसार रिकॉर्ड ही नहीं मिला, जिसके बाद उच्चाधिकारियों ने बगैर रिकॉर्ड का मिलान हुए औपचारिक अनुमति पर आपत्ति जता दी है।
बताते हैं कि रक्षा मंत्रालय से आपत्ति पत्र जारी होने के बाद रक्षा संपदा विभाग ने प्रशासन से भूमि संबंधी रिकॉर्ड मांगे थे, जिसमें चकबंदी से पहले की खसरा संख्या 200, 201, 205, 206, 207 दर्ज थी, जिसके अनुसार भूमि 3.62 एकड़ मिली, लेकिन वह इन खसरा संख्या में दर्ज नहीं थी। पड़ताल के बाद पता चला कि चकबंदी से पहले के रिकॉर्ड के आधार पर खसरा संख्या दर्ज की गई थी। जो चकबंदी के दौरान बदल गई थी। प्रशासन की इस त्रुटि के चलते रक्षा मंत्रालय में अनुबंध स्वीकृत नहीं हो सका है। हालांकि, अब मामले पर रक्षा संपदा विभाग ने पहल करते हुए एक बार फिर संशोधित खसरा संख्या दर्ज कर टैक्सी-वे के अनुबंध के लिए फाइल उच्चाधिकारियों को भेज दी है। 24 मई को स्वीकृति के लिए भेजी गई फाइल पर फिलहाल कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।
लैंड रिकॉर्ड संशोधित कर उच्चाधिकारियों के जरिए रक्षा मंत्रालय से अनुबंध की औपचारिक स्वीकृति कराने की जिम्मेदारी रक्षा संपदा विभाग की है। खसरा संख्या बदलने से चल रहे निर्माण कार्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
- राजीव कुलश्रेष्ठ, संयुक्त महाप्रबंधक, एएआई