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पॉल साहब! कब आएंगे आप, माहौल है बड़ा खराब

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बरेली। छुट्टी खत्म होने के बाद नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. के पहुंचने की संभावना के बीच मंगलवार को भाजपा पार्षदों का धरना प्रदर्शन उग्र हो गया। पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार भाजपा पार्षदों ने नगर आयुक्त कार्यालय के बाहर तंबू गाड़ लिया। विवाद की आशंका को देख निगम में फोर्स तैनात कर दी गई। मगर माहौल को भांपकर नगर आयुक्त छुट्टी से लौटने के बावजूद नगर निगम नहीं पहुंचे। दोपहर में सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार और सीओ प्रथम कुलदीप कुमार वहां पहुंचे। उन्हें देखकर पार्षदों ने खूब नारेबाजी की। साथ ही पार्षद एक-दूसरे से यह पूछते नजर आए कि पॉल साहब कब आएंगे। सिटी मजिस्ट्रेट ने कुछ लोगों के साथ बैठकर बात करने को कहा लेकिन पार्षद वहीं पर बात करने को लेकर अड़े रहे। स्पष्ट कह दिया कि जब तक मुकदमा एक्सपंज नहीं होगा, धरना जारी रहेगा। इसके बाद वह चले गए और शाम को नगर निगम व उसके 200 मीटर के दायरे में धारा 144 लागू कर दी गई।
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सोमवार तक नगर आयुक्त के छुट्टी पर होने के कारण धरना प्रदर्शन की रस्म अदायगी चल रही थी। मगर मंगलवार को नगर आयुक्त की वापसी पर जोरदार विरोध की तैयारी थी। पार्षदों के साथ ही भाजपा के महानगर अध्यक्ष डॉ. केएम अरोरा समेत तमाम भाजपाई और जनता धरना में शामिल होने पहुंचे। नगर आयुक्त कार्यालय के सामने टेंट लगाने से नगर आयुक्त के अर्दली ने रोका तो सुबह से ही टकराव का माहौल बन गया। सबको नगर आयुक्त के आने का इंतजार था और नारेबाजी जारी थी। इसी बीच कोतवाली इंस्पेक्टर पंकज वर्मा फोर्स के साथ पहुंचे तो तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। इसी बीच में पता चला कि नगर आयुक्त अपने आवास पर आ चुके हैं और कुछ ही देर में नगर निगम पहुंचेंगे तो पार्षदों ने नारेबाजी तेज कर दी। तब तक सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ प्रथम वहां पहुंच गए। माहौल गरमाया तो नगर निगम के कर्मचारी पुलिस बल के साथ एकत्र होने लगा। यह देख अफसरों ने निगम कर्मचारियों को वहां से हटाया। इस बीच सिटी मजिस्ट्रेट ने महानगर अध्यक्ष और उपसभापति अतुल कपूर को वार्ता के लिए अलग बुलाना चाहा तो उन लोगों ने सबके सामने बात करने को कह दिया। कहा- मुकदमा एक्सपंज कराने से कम पर कुछ नहीं हो सकता। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ वहां से चले गए तो कुछ देर में माहौल सामान्य हो गया। दोपहर में खाना और चाय-नाश्ता के बाद शाम पांच बजे रोजाना की तरह पार्षदों ने धरना खत्म कर दिया। इस दौरान छंगामल मौर्य, नरेश शर्मा बंटी, सतीश कातिब, अजय चौहान, अशोक गंगवार समेत तमाम पार्षद और भाजपा से प्रतेश पांडेय, प्रदीप अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

बार-बार उड़ी नगर आयुक्त के आने की अफवाह
धरने के दौरान कुछ पार्षद बार-बार नगर आयुक्त के कुछ देर में पहुंचने की अफवाह उड़ाकर एक-दूसरे को छेड़ते रहे। जो धरने में नहीं पहुंचे, वे भी फोन पर उनके संपर्क में थे। मगर शाम तक नगर आयुक्त नहीं पहुंचे। बता दें कि भाजपा पार्षद पहले ही प्रदेश अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय को पत्र लिखकर अवगत करा चुके हैं कि वे न तो नगर आयुक्त को कार्यालय में बैठने देंगे, न काम करने देंगे।
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धरने के बीच मस्ती और सेल्फी
नगर निगम में धरना प्रदर्शन कुछ पार्षदों ने पिकनिक में तब्दील कर दिया। खाना, चाय-नाश्ता के साथ ही कोई सेल्फी लेते नजर आया तो दोपहर बाद शेरो-शायरी का दौर भी चला।

तो इकट्ठे मत आना ज्ञापन देने..
नगर निगम में पेयजल, गंदगी, सीवर, स्ट्रीट जैसी अधिकांश समस्याएं ऐसी होती हैं, जो व्यक्ति विशेष के बजाय आबादी के एक हिस्से को प्रभावित करती हैं। ऐसे में यहां चलन है कि शिकायत लेकर भी मोहल्ले के तमाम इकट्ठे होकर ही आते हैं। अब नगर निगम में आचार संहिता लागू हो गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यह लोग अपनी शिकायतें लेकर कैसे आएंगे क्योंकि एकसाथ आने पर धारा 144 का उल्लंघन होगा।

मेयर की बात
लोकतंत्र का हनन है कि पार्षदों को अपने ही ऑफिस या सदन में न आने दिया जाए। इससे प्रशासन की मंशा पर सवाल उठता है, प्रशासन चाहता ही नहीं कि नगर निगम में काम हों। क्योंकि क्षेत्र में होने वाले काम पार्षद ही बताते हैं। क्या जनता भी अब आई कार्ड लेकर आएगी। मोहल्ले के तो 10-15 लोग ही शिकायत लेकर आते हैं। यहां तो विधानसभा से भी ज्यादा सुरक्षा कर दी गई है। ऐसा ही रहा तो मुझे लगता है कि जनता के कार्यों को लेकर पार्षदों का जिला प्रशासन से टकराव हो सकता है। पूरे मामले को प्रदेश अध्यक्ष के समक्ष रख दिया गया है।
- उमेश गौतम, मेयर

नगर निगम में धारा 144 लागू कर देने से पार्षद डरने वाले नहीं हैं। अनिश्चित कालीन धरना जारी रहेगा। इसको लेकर बुधवार पार्टी के पदाधिकारियों के साथ बैठक करके आगे की रणनीति तय की जाएगी।
- अतुल कपूर, उपसभापति

पूर्व मेयरों की बात
मुझे तो याद नहीं कि नगर निगम में कभी धारा 144 लगी हो या कभी पार्षद पर रिपोर्ट कराई गई हो। विवाद रहने पर शासन से शिकायत होती थी, वहां से कार्रवाई की जाती थी। मगर यहां तो टकराव से जनहित प्रभावित होने लगा है। पार्टी संगठन को इसे गंभीरता से लेकर समाधान करना चाहिए क्योंकि बरसात आने वाली है।
- सुभाष पटेल, पूर्व मेयर

जनता को परेशान देखकर व्यथित हूं। गर्मी चरम पर है, गंदगी से जल्दी बीमारी की स्थिति बन जाएगी। नाला सफाई नहीं हुई है और बरसात आने वाली है। भाजपा सरकार में मुझे तो पहले से ही उम्मीद थी कि ऐसा होने वाला है। मगर यह स्थिति नहीं आने देनी चाहिए थी। मेयर का काम होता है कि वह सामंजस्य बनाकर रखे।
- सुप्रिया ऐरन, पूर्व मेयर

निगम में ऐसी परिस्थितियां कभी नहीं आईं जो धारा 144 लगानी पड़ी हो। निगम से लेकर केंद्र तक भाजपा की सरकार है और करप्शन को बढ़ावा दिया जा रहा है। भाजपा की निगम सरकार शासन की मंशा के खिलाफ काम कर रही है। शहर में दुर्दशा है, लोग पेयजल, पानी निकासी, गंदगी से त्रस्त हैं, ये लड़ाई में उलझे हैं।
- डॉ. आईएस तोमर, पूर्व मेयर

विशिष्ट लोगों की बात
नगर निगम में टकराव अच्छा नहीं है, इससे जनहित प्रभावित होते हैं। माननीय नगर विकास मंत्री को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि जनता की समस्याएं दूर की जा सकें। - अनुपम सक्सेना, आर्किटेक्ट

निगम में धारा 144 लागू होने से जनता को परेशानी बढ़ेगी। बड़े अधिकारियों को बैठकर मामला सुलझाना चाहिए। अफसर बीच का रास्ता निकालें, इससे खराब संदेश जा रहा है। - हकीम खुर्शीद मुराद

टकराव अच्छा नहीं है। अधिकारियों की ड्यूटी अच्छी सेवा देना है। मेयर और पार्षद जनप्रतिनिधि हैं, जो जनता ने चुनकर भेजे हैं। जनहित में यह टकराव किसी भी तरह खत्म होना चाहिए। - अनिल साहनी, प्रगतिशील किसान

जब तक हम अहम छोड़कर ईमानदारी से काम नहीं करेंगे स्मार्ट सिटी का लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकते। निगम प्रशासन जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर रहा। सारी व्यवस्थाएं चौपट पड़ी हैं। - डॉ. विकास वर्मा, होम्योपैथिक चिकित्सक
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