बरेली। मुख्य डाकघर में पिछले साल हुए करोड़ों के गबन की विभागीय और पुलिस की जांच का कोई नतीजा न निकलने के बाद अब जांच की जिम्मेदारी सीबीआई के सुपुर्द कर दी गई है। सीबीआई ने इस मामले में प्रारंभिक छानबीन के साथ रिकॉर्ड जुटाने शुरू कर दिए हैं, जिससे विभागीय अधिकारियों की बेचैनी बढ़ गई है। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई की कार्रवाई से बचने के लिए सबूतों में भी हेराफेरी शुरू कर दी गई है।
मुख्य डाकघर में पिछले साल फरवरी में चेकों के जरिये करोड़ों रुपये का गबन कर लिए जाने के मामले का खुलासा हुआ था। इस घोटाले में मुख्य आरोपी उप डाकपाल वाईके शर्मा को माना गया था। जांच में पता चला था कि वाईके शर्मा पर डाकघर में खातेदारों को चेक से पेमेंट करने की जिम्मेदारी थी। इसी का फायदा उठाकर उन्होंने तमाम चेकों के जरिये करोड़ों की धनराशि अपने परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में जमा करा दी थी। यह खेल करीब छह महीने तक चलता रहा लेकिन इसकी भनक अफसरों को नहीं लगी। तत्कालीन प्रवर डाक अधीक्षक रामेश्वर प्रसाद के पास एक गोपनीय पत्र पहुंचने के बाद इस गोलमाल का खुलासा हुआ। रिकार्ड की छानबीन में भी इसकी पुष्टि होने के बाद कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
विभागीय जांच में पता चला किया वाईके शर्मा के पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय से बेहतर संबंध थे, इसलिए वह अपने और अपने परिवार के सदस्यों के खातोें में सरकारी धन जमा करता रहा। छानबीन में यह पता चलने के बाद कि कई चेक आईसीआईसीआई बैंक में जमा हुए हैं, डाक विभाग ने आईसीआईसीआई बैंक को पत्र लिखकर चेकों का ब्योरा मांगा। बैंक की ओर से लंबे समय तक टालने के बाद यह जानकारी डाक विभाग को दी गई। विभागीय जांच के दौरान दूसरे बैंकों में भी शर्मा के परिवार के खातों की छानबीन के बाद पौने तीन करोड़ से ज्यादा रकम के गोलमाल का मामला सामने आया। हालांकि इसके बावजूद पुलिस आरोपियों को बचाने की कोशिश करती रही। नतीजा यह हुआ कि पूरा शर्मा परिवार बरेली से फरार हो गया। हालांकि बाद में वाईके शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल वह जेल में है।
चुपचाप बहाल कर दिए आरोपी कर्मचारी
करोड़ों के इस घोटाले में 13 और कर्मचारियों की भी सांठगांठ और लापरवाही सामने आई जिन्हें सस्पेंड कर दिया गया था। अमर उजाला ने इस खेल को उजागर किया था। पिछले दिनाें यह मामला सीबीआई पहुंचा तो खलबली मच गई। इस बीच पीएमजी कार्यालय और प्रवर डाक अधीक्षक कार्यालय की साठगांठ से तीन-चार कर्मचारियों को बहाल कर दिया गया। इनमें घोटाले में सीधे शामिल कर्मचारी भी बताए जाते हैं। सीबीआई से बचने को सबूतों से छेड़छाड़ भी होने लगी है। हालांकि प्रवर डाक अधीक्षक पीके सिंह प्रकरण को गोपनीय बताते हुए कुछ भी बताने से इंकार कर रहे हैं।