बरेली। हरि मंदिर में चल रही रामकथा के सातवें दिन कथाव्यास पंडित ब्रजेश पाठक ने जीवन की सार्थकता के लिए भक्तों को भक्ति मार्ग अपनाने का सुझाव दिया गया। कहा कि मनुष्य का प्रयास होना चाहिए कि वह भगवान से सीधे जुड़कर उनका प्रिय बन जाए। भगवान को अपना बना लेना ही भक्ति है। इस दौरान जटायू द्वारा भगवान श्रीराम को पुत्र मान लेने और राम द्वारा शबरी को माता मान लेने के रामायण प्रसंग की कथा सुनाई। कहा कि भगवान जितना संबंधों का निर्वाह करते हैं उतना कोई नहीं कर सकता है। कथा के दौरान सतीश खट्टर, रवि छाबड़ा, सुशील कुमार, जितिन दुआ आदि मौजूद रहे।