बरेली। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि खनन प्रभावित इलाकों के सुधार के कामों के लिए रायल्टी का एक हिस्सा डिस्ट्रिक मिनरल फंड यानी डीएमएफ में जमा हो जिसे डीएम की अध्यक्षता में बनी समिति प्रस्ताव तैयार कर खर्च करे। बरेली में इस मद की 50 लाख रुपये से ज्यादा धनराशि दो साल से अफसर दबाए बैठे हैं।
पिछले तीन सालों में डीएमएफ में 50.28 लाख रुपये जमा हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक इस रकम से उन इलाकों का विकास होना था जहां खनन के पट्टे दिए गए हैं। इसके लिए डीएम की अध्यक्षता में समिति भी बनी हुई है जिसमें खनन अधिकारी, डीएफओ समेत कई अधिकारियों के साथ कुछ जनप्रतिनिधियों भी शामिल हैं। इसी समिति को प्रस्ताव लाकर इस फंड से प्रभावित इलाकों में टूटी सड़कों का निर्माण, पौधरोपण आदि कराना होेता है। बरेली में दो साल से इस मद में एक भी पैसा खर्च नहीं किया गया है। बता दें कि पूर्व जिला खनन अधिकारी शिवि सिंह का डीएमएफ की रकम से स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालयों का निर्माण न कराने पर ट्रांसफर कर दिया गया था। इसके बावजूद खनन विभाग नहीं जागा।
डीएमएफ की रकम से विकास कार्य नहीं हो सके हैं। पिछली बार शौचालयों को बनवाने के लिए यह रकम खर्च की जानी थी। इस बार इससे विकास कार्य कराने के प्रस्ताव लाए जाएंगे। -मनोज कुमार पांडेय, एडीएम वित्त