बदायूं। बदायूं-उझानी मार्ग पर बनाए गए बाईपास के बीच में आ रही सोत नदी पर पुलिया का निर्माण बकाया रह गया है। इस पुलिया के लिए अब तीन करोड़ बढ़ाकर 15 करोड़ का एस्टीमेट भेजा गया है। तीन साल पहले जब सेतु निगम ने बाईपास निर्माण का प्रस्ताव भेजा था तो पुलिया का एस्टीमेट 12 करोड़ ही था। मगर राजनीति के फेर में फंसने के कारण अब तीन करोड़ और बढ़ाने पड़े हैं।
शहर में जाम की समस्या को देखते हुए वर्ष 2016 में तत्कालीन सांसद धर्मेंद्र यादव के प्रयासों से बरेली-मथुरा हाईवे पर बाईपास निर्माण की कवायद शुरू हुई थी। तब प्रदेश में सपा की सरकार थी। शासन ने बाईपास के निर्माण को मंजूरी प्रदान करते हुए बजट आवंटन कर दिया था। बाईपास के निर्माण में 110 करोड़ की लागत आई। तीन साल में बाईपास बनाने का काम पूरा होने के बाद अब फिर पुलिया की पीडब्ल्यूडी और सेतु निगम का जोर है।
नदी पर पुलिया बनाने के लिए वर्ष 2016 में ही 12 करोड़ छह लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन 2017 में प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के कारण यह पास नहीं हो सका। कहा तो यह भी जा रहा है कि इसे जानबूझकर अटकवाया गया। खैर अब बाईपास बनने के बाद जिला प्रशासन की पहल पर एक बार फिर से कार्यदायी संस्था सेतु निगम ने पुल निर्माण के लिए 15 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर भेजा है, जिसे मंजूरी का इंतजार है।
चार राजमार्गों को मिलाता है बाईपास
शहर का यह बाईपास मार्ग बरेली-मथुरा, बदायूं-मेरठ, बदायूं-बिजनौर और मुरादाबाद-फर्रुखाबाद राजमार्गों को आपस में मिलाता है। चारों राजमार्ग जिला मुख्यालय को छूते हैं और चारों ही राजमार्ग इस बाईपास से मिल रहे हैं।
बाईपास पर सोत नदी की पुलिया के लिए अभी मंजूरी नहीं मिल सकी है। इस वजह से वह नहीं बन सकी है। इस बार सेतु निगम की ओर से 15 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। अभी लोगों की सुविधा के लिए मिट्टी और ईंटे डालकर उसे निकलने के लिए कामचलाऊ रास्ता बना दिया गया है। -प्रमोद कुमार, अधिशासी अभियंता, द्वितीय, लोनिवि