बरेली। मोदी सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट में ही छोटे दुकानदारों को पेंशन देने का फैसला किया, लेकिन सरकारी सिस्टम इन छोटे लोगों पर सितम करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है। गली-मोहल्लों में छोटा कारोबार करने वालों पर दनादन खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन (एफएसडीए) कार्रवाई कर रहा है। करीब तीन माह पहले लिए गए नमूनों की लैब रिपोर्ट आ गई है। ‘समझौता’ नहीं होने पर 26 नमूने फेल होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ न्यायालय में वाद दायर किया है।
केंद्र में भारी बहुमत से बनी भाजपा सरकार ने पहली कैबिनेट बैठक में ही छोटे दुकानदार और किसानों को राहत देने वाले फैसले लिए। श्रम व रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष गंगवार ने अपने मंत्रालय से छोटे दुकानदारों को पेंशन दिलाने का मसौदा तैयार कराया, इससे देश भर में तीन करोड़ से ज्यादा छोटे कारोबारी इस योजना की सीमा आ गए। इधर, खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन (एफएसडीए) अफसर छोटे दुकानदारों का कारोबार ही चौपट करने का अभियान चला रहे हैं। तीन माह पहले विभाग ने तमाम नमूने भरे थे, लेकिन लैब रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की। कुछ माह पहले ही पिज्जा का नमूना भी फेल हुआ, इस मामले में विभाग कोई जानकारी नहीं दे रहा है। लेकिन उसने 26 छोटे दुकानदारों से लिए पनीर, दूध और मावा के नमूने फेल होने सूचना जारी कर दी है। साथ ही बताया गया कि संबंधित कारोबारी के खिलाफ अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में मामला दायर कर दिया है।
नहीं चला अभियान
बडे़ प्रतिष्ठान और कारोबारियों से तालमेल होने से एफएसडीए विभाग कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं करता है। दिवाली से होली तक लिए गए नमूनों की लैब रिपोर्ट बताने से विभाग इनकार करता है। पिछले दिनों बिहारीपुर में दो कोटेदारों से लिए गेहूं नमूनों की रिपोर्ट दबा दी गई है। बताया जाता है कि प्रमुख प्रतिष्ठान और कोटेदारों का नमूना फेल हो गया है, लेकिन विभाग गोपनीय रिपोर्ट बताकर जानकारी नहीं देना चाहता है। रमजान त्योहार पर खुले आम रंगीन कचरी बिकती रही और खुले में खजूर भी हर जगह बिकते मिल जाएंगे, लेकिन एक भी नमूना एफएसडीए ने नहीं लिया और ना ही कोई अभियान चलाया। वाहवाही लूटने के लिए छोटे कारोबारी और दुकानदारों के प्रतिष्ठानों से नमूने भरे जाते हैं। अगर किसी से सौदा पट गया तो नमूना पास नहीं तो फेल। दो सप्ताह पहले 26 नमूनों की लैब रिपोर्ट एफएसडीए जिला कार्यालय को मिल गई, लेकिन 26 मामलों में अब वाद दायर किया गया है। इसमें पनीर, मावा, दूध, दही, बेसन, खेसारी दाल, आईस कैंडी, सोयाबीन सॉस नमूने फेल हुए मामले शामिल हैं। जिला अभिहित डीआर मिश्रा ने बताया कि लैब जांच में फेल हुए नमूनों के 26 मामले एसीजेएम (प्रथम) न्यायालय में दायर किए गए हैं। न्यायालय प्रक्रिया में कार्रवाई होगी।