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नाले पर बनी मजार से लगी दुकानें हटवाए नगर निगम

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नाले पर बनी मजार से लगी दुकानें हटवाए नगर निगम - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। लाल निशान लगाने के करीब साल भर बाद सिविल लाइंस स्थित मजार की दुकानें अवैध होने का मामला एक बार फिर गरमाया है। मजार की इंतजामिया कमेटी वक्फ ट्रिब्यूनल में दुकानों को मजार का हिस्सा नहीं साबित कर सकी। यह मामला मेयर उमेश गौतम के संज्ञान में देकर नाले पर बनी यह दुकानें ध्वस्त कराने की शिकायत की गई है। इस पर मेयर ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर नाले पर बनी दुकानें ध्वस्त कराने के निर्देश दिए हैं।
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पिछले साल अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान निगम की टीम ने सिविल लाइंस में बनी मजार से लगी दुकानों को अवैध बताकर लाल निशान लगाए थे। तीन दर्जन से
अधिक इन दुकानों को निगम की जमीन और नाले पर बना हुआ बताया गया था। काफी हंगामे के बाद निगम की कार्रवाई रुक गई और मामला वक्फ ट्रिब्यूनल में पहुंच गया। मगर इंतजामिया कमेटी ट्रिब्यूनल में साबित नहीं कर सकी कि यह दुकानें मजार का हिस्सा हैं। हालांकि मार्च में इसे खारिज कर दिया गया। इसको लेकर बाकरगंज निवासी आसिफ खां ने मेयर उमेश गौतम से शिकायत की है। उन्होंने इसकी जानकारी देते हुए दुकानें ध्वस्त कर नाले से अतिक्रमण हटाने को कहा है। इस पर मेयर उमेश गौतम ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर पुलिस बल के साथ अवैध कब्जा हटाने के निर्देश दिए हैं।

फिलहाल मामला हाईकोर्ट में
वहीं मजार की इंतजामिया कमेटी के सचिव डॉ. नफीस ने बताया कि कमेटी वक्फ ट्रिब्यूनल में यह साबित नहीं कर सकी है कि दुकानें मजार का हिस्सा हैं क्योंकि सारे दस्तावेज वक्फ बोर्ड के पास होते हैं। इसके चलते वक्फ बोर्ड और दुकानदारों ने अब हाईकोर्ट में मामला दायर कर दिया है। वहां से कुछ दुकानदारों को स्टे भी मिल गया है।
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अवैध दुकानें मजार का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि उसके पीछे बनी हुई हैं। कोर्ट में वे लोग केस हार गए हैं। नगर आयुक्त को यह अवैध दुकानें हटवाने के लिए पत्र लिखा गया है।
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- उमेश गौतम, मेयर
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