बरेली। लाल फाटक ओवरब्रिज के निर्माण में सेना की एनओसी ही बड़ी बाधा नहीं है बल्कि सेतु निगम और प्रशासन के अधिकारियों की बेपरवाही भी ‘रोड़ा’ बनी हुई है। हालत यह है कि अधूरे निर्माण की वजह से जानलेवा हो रहे ओवरब्रिज का निर्माण को जल्द पूरा कराने के लिए रक्षा संपदा कार्यालय की ओर से बार-बार वर्क ऑर्डर लेने का सुझाव दिया जा रहा है लेकिन सेतु निगम की ओर से कोई जवाब ही नहीं दिया जा रहा है। अब एक बार फिर रक्षा संपदा कार्यालय ने सेतु निगम को रिमाइंडर भेजकर उच्चाधिकारियों के जरिये वर्क ऑर्डर की सैद्धांतिक अनुमति लेकर निर्माण शुरू कराने को कहा है। हालांकि सेतु निगम ने इस बार भी अपना रुख साफ नहीं किया है।
पिछले साल नवंबर में लाल फाटक ओवरब्रिज के निर्माण को पूरा कराने के लिए प्रशासन ने जमीन के बदले जमीन देने की प्रक्रिया शुरू की थी। रक्षा संपदा विभाग की टीम ने बभिया में प्रशासन की ओर से दी जा रही जमीन का निरीक्षण किया मगर कैंट बोर्ड ने दूरी को कारण बताते हुए उसे लेने से इंकार कर दिया जिसके बाद सेतु निगम के अधिकारियों और प्रशासन के तत्कालीन एसडीएम को डीईओ की ओर से वर्क ऑर्डर की सैद्धांतिक अनुमति लेने का सुझाव दिया गया था। इस पर प्रशासन और सेतु निगम के अफसरों ने कोई रुचि नहीं ली जिसके बाद फिर जमीन लेने की कवायद शुरू हुई लेकिन प्रशासन ने आखिरकार जमीन खोजने में असमर्थता जता दी। मार्च में एक बार फिर डीईओ ने वर्क ऑॅर्डर लेकर निर्माण पूरा कराने का सुझाव दिया। इस बार भी अधिकारी खामोश रहे। तीन महीने बाद पिछले दिनों एक बार फिर डीईओ ने सेतु निगम के अफसरों को पत्र लिखकर ओवरब्रिज का अधूरा निर्माण पूरा कराने के लिए वर्क ऑर्डर लेने का सुझाव दिया है। सेतु निगम के अफसरों की ओर से फिलहाल इस बार भी कोई साफ रुख नहीं दिखाया गया है।
आखिर क्यों वर्क ऑर्डर नहीं लेना चाहते अफसर
वर्षों से लाल फाटक निर्माण को लेकर सेना की एनओसी का इंतजार है। ऐसे में जमीन के बदले जमीन, लीज पर जमीन लेने समेत जमीन की कीमत अदा करने की प्रक्रिया भी नहीं बढ़ पा रही है। दूसरी ओर लाल फाटक ओवरब्रिज पर हादसों का दौर जारी है। सूत्रों के मुताबिक सेना की एनओसी मिलना आसान नहीं है। यह बेहद लंबी प्रक्रिया है। ऐसे में रक्षा मंत्रालय से वर्क ऑर्डर की सैद्धांतिक अनुमति लेकर निर्माण कार्य शुरू कराना ही बेहतर विकल्प है। बार-बार सेतु निगम के अफसरों को उच्चाधिकारियों के जरिए रक्षा मंत्रालय से सैद्धांतिक अनुमति लेने का सुझाव दिया जा रहा है, लेकिन अधिकारी खामोश हैं। अधिकारियों की यह ‘चुप्पी’ उन पर सवालिया निशान लगा रही है।
डीईओ या कैंट बोर्ड नहीं दे सकते वर्क ऑर्डर
रक्षा संपदा कार्यालय या कैंट बोर्ड के पास वर्किंग ऑर्डर संबंधी सैद्धांतिक अनुमति देने का अधिकार नहीं है। हालांकि वे सेतु निगम या प्रशासन को सुझाव भी नहीं दे सकते हैं, लेकिन जनहित को देखते हुए सुझाव दे भी रहे हैं तो सेतु निगम और प्रशासन दोनों नजरअंदाज कर रहे हैं। नियमानुसार लाल फाटक निर्माण कार्य को पूरा कराने के लिए वर्किंग ऑर्डर की सैद्धांतिक अनुमति के लिए सेतु निगम को अपने विभागीय उच्चाधिकरियों के जरिए रक्षा मंत्रालय से अनुमति लेनी होगी।
रक्षा संपदा कार्यालय की ओर से किसी निर्माण कार्य के बाबत सैद्धांतिक अनुमति नहीं दी जा सकती। सैद्धांतिक अनुमति रक्षा मंत्रालय प्रदान करता है। अधर में पड़े ओवरब्रिज निर्माण कार्य से हो रहे हादसे और दुश्वारियों को देखते हुए सेतु निगम के अफसरों को वर्किंग ऑर्डर लेकर निर्माण कार्य पूरा कराने का सुझाव देते रहे हैं, पर उनकी ओर से अब तक सकारात्मक जवाब नहीं मिला है।
- प्रमोद कुमार सिंह, डीईओ
लालफाटक ओवरब्रिज के लिए कैंट बोर्ड के अफसरों से बात चल रही है। परमीशन मिलने के बाद ही कैंट के हिस्से में पुल बनाने का काम शुरू होगा। एनओसी के लिए रक्षा मंत्रालय के पास पहले से ही फाइल भेजी जा चुकी है। -वीके सेन, उप परियोजना प्रबंधक सेतु निगम
फिलहाल इस मामले की जानकारी मुझे नहीं है। इस संबंध में सेतु निगम और कैंट दोनों के अफसरों से बात कर मामले का निस्तारण कराया जाएगा। -रणवीर प्रसाद, कमिश्नर