बरेली। शब-ए-कद्र की रात माहे रमजान में सबसे अहम है। बृहस्पतिवार को 27वीं शब (रात) रोजेदारों ने इबादत में गुजारी। घरों से लेकर मस्जिदों, खानकाहों और दरगाहों पर लोग रात भर कुरान की तिलावत और नमाज अदा करते रहे। अपने अजीजो अकारिब के लिए दुआ भी की। जो लोग दुनिया से रुखसत हो गए, उनके लिए दुआ-ए-मगफिरत मांगी।
मजहबी दानिश्वरों के अनुसार रमजान की 27वीं शब सबसे अहम मानी गई है। यह अहम इसलिए है कि इसी दिन अल्लाह ता कलाम नबीए करीम पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब पर नाजिल हुआ। जो आज कुरान के तौर पर दुनिया के सामने है। इसीलिए इस रात को शब-ए-कद्र कहते हैं। तमाम मुसलमान पूरी रात में इबादत में बैठे। इसमें तमाम लोग घरों पर ही इबादत कर रहे हैं। दरगाह आला हजरत, खानकाह नियाजिया, आस्ताने आलिया शराफतिया, आस्ताने आलिया मोहम्मदिया, खानकाह वामिकिया निशातिया, दरगाह शाहदाना वली सहित अन्य इबादतगाहों में लोग तिलावते कुरान और दुआएं करते रहे।