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नवाबगंज जमीन घोटाला : आरोपी अहलमद चार महीने से गायब.. नहीं पहुंचा दफ्तर

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बरेली। नवाबगंज जमीन घोटाले के मुख्य आरोपी अहलमद रमोद सक्सेना करीब चार माह से दफ्तर में हाजिर ही नहीं हुए हैं। निलंबन के दौरान जीवन निर्वाह भत्ते के लिए भी दरख्वास्त नहीं दी गई। जिला चकबंदी अधिकारी की तरफ से उन्हें नोटिस भी भेजा जा चुका है। ऐसे में विभागीय अधिकारी परेशान हैं कि रमोद आखिर है कहां। उधर, रमोद सक्सेना ने शासन में यह प्रार्थनापत्र भेजा था कि निलंबन की अवधि तीन माह गुजर जाने के बावजूद उसे चार्ज शीट नहीं दी गई है। इसलिए नियमानुसार उसकी बहाली हो जानी चाहिए।
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बरेली में तैनात रहे एडीएम सिटी ओपी वर्मा ने इस मामले की जांच इस साल जनवरी में की थी। सामने आया था कि गांव डंडिया नजमुल निशा में अबरार हुसैन की करीब सौ बीघा जमीन को खतौनी में जालसाजी कर हड़पने की कोशिश की गई है। घोटालेबाजों की साठगाठ से सरकारी दफ्तरों में बैठे स्टाफ ने वर्ष 2016 में उप संचालक चकबंदी अधिकारी रहे रमाकांत शुक्ला के एक आदेश को व्हाइटनर लगाकर बदल दिया था। जांच में चकबंदी न्यायालय के अहलमद रमोद सक्सेना और हापुड़ निवासी तारिक के बेटे फिरोज सहित आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। चकबंदी अहलमद ने खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए अदालत का सहारा लिया। सीजेएम कोर्ट में दी गई अर्जी में उसने आरोप लगाया है कि उसे इस प्रकरण में फंसाया जा रहा है। इस मामले में रमोद और फिरोज को कलक्ट्रेट में झगड़ा करने के आरोप में सिटी मजिस्ट्रेट ने शांति भंग में दोनों को जेल भेज दिया था। 24 घंटे से ज्यादा जेल में रहने पर अहलमद को चकबंदी अधिकारी ने सस्पेंड कर दिया। इसके बाद से रमोद के दफ्तर न पहुंचने से विभागीय अफसर परेशान हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अब तक इसकी कोई सूचना नहीं है कि रमोद कहां हैं और वह दफ्तर में क्यों उपस्थित नहीं हो रहा है। उसे इसके लिए नोटिस भी दिया जा चुका है।

‘अहलमद रमोद सक्सेना सस्पेंड होने के बाद से ही गायब हैं। उन्होेंने दफ्तर में पहुंचकर अपना पक्ष भी नहीं रखा है और न ही निलंबन अवधि के दौरान मिलने वाले जीवन निर्वाह भत्ते के लिए प्रार्थनापत्र दिया है। जबकि उन्हें नोटिस भी दिए जा चुके हैं।’
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- प्रेमचंद द्विवेदी, जिला चकबंदी अधिकारी
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