बरेली। आजादी के सत्तर साल बाद भी देश के विभाजन की त्रासदी की असल तस्वीर देखनी है तो आप हजियापुर में सितारा बेगम के परिवार से मिल सकते हैं। हिंदुस्तान में पैदा होने के बावजूद सितारा बेगम और उनके पति शब्बीर मोहम्मद उर्फ बाबू के साथ उनके नौ में से तीन बच्चों के माथे पर भी पाकिस्तानी होने का लेवल लग गया। बाकी छह बच्चे हिंदुस्तानी हैं। सरकारी तौर पर खुद को हिंदुस्तानी साबित करने के लिए खुफिया विभाग के चक्कर लगाते-लगाते शब्बीर आखिरकार चल बसे। अब सितारा बेगम की जिंदगी भी अंतिम पड़ाव पर है। करीब 50 साल की मशक्कत के बावजूद पाकिस्तानी होने का दाग मिटाने की उनकी कोशिशें कामयाब नहीं हो पाई हैं। बेटा परवेज और दो बेटियां परवीन और नसरीन भी न जाने कितनी बार कागजी खानापूरी कर चुके हैं, लेकिन उन्हें भी हिंदुस्तान की नागरिकता नहीं मिल पाई। हाल ही में इस परिवार की दिक्कत सरकार की ओर से भेजे गए उस नोटिस ने बढ़ा दी है जिसमें कहा गया है कि जल्द नागरिकता का मामला हल न कराने पर इस परिवार के गैर हिंदुस्तानी सदस्यों को पाकिस्तान जाना पड़ेगा।
हिंदुस्तान और पाकिस्तान के साथ इस परिवार का भी विभाजन कैसे हो गया, इसके पीछे लंबी कहानी है। शब्बीर के पिता खान मोहम्मद का परिवार आजादी से पहले नरकुलागंज में जहां बसा हुआ था, वह इलाका अब नई बस्ती कहलाता है। शब्बीर के अलावा खान मोहम्मद के तीन और बेटे प्यारे, नूर मोहम्मद और लल्लू थे। शब्बीर की शादी शाही कस्बे की सितारा बेगम से हुई। देश का बंटवारा हुआ तो प्यारे, नूर मोहम्मद और शब्बीर अपने परिवारों के साथ पाकिस्तान के करांची चले गए, लेकिन लल्लू ने बरेली नहीं छोड़ा। करीब 20 साल तक पाकिस्तान में रहने के बाद शब्बीर और उनकी पत्नी सितारा बेगम का मोह भंग हो गया। दोनों बेटे परवेज और बेटी व नसरीन के साथ बरेली में भाई हाजी लल्लू के पास आ गए। अब तक हाजी लल्लू यहां बान के बड़े कारोबारी कहलाने लगे थे। उनकी मदद से शब्बीर भी यहीं बस गए लेकिन इसके बाद उन्हें पाकिस्तान जाने की बड़ी कीमत चुकाने पड़ी। सन 1968 से 2015 में 90 साल की उम्र में इंतकाल होने तक शब्बीर को काफी कोशिश के बावजूद हिंदुस्तान की नागरिकता नहीं मिली। पाकिस्तानी होने का दाग लगा होने की वजह से उन्हें दो बार जेल में नजरबंद भी रखा गया।
शब्बीर के बाद उनकी पत्नी सितारा बेगम, बेटे परवेज, बेटी परवीन और नसरीन की जिंदगी भी खुफिया विभाग के चक्कर लगाते हुए गुजरती रही। परवेज की पत्नी और बच्चों के साथ परवीन और नसरीन के पति और बच्चे भी हिंदुस्तानी हैं, लेकिन परवेज और उनकी दोनों बहनों को भारत की नागरिकता नहीं मिल पाई। परवेज के मुताबिक एक बार आवेदन करने पर ढाई से तीन हजार रुपये खर्च होते हैं लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकलता। चारों यहां वीजा पर रह रहे हैं। 90 साल की हो चुकीं सितारा बेगम अब चलने-फिरने से भी मजबूर हो चुकी हैं। अब केंद्र सरकार की ओर से इन लोगों को फिर ऑनलाइन आवेदन करने को नोटिस भेजा गया है।
नहीं मिलतीं सरकारी सुविधाएं
हजियापुर में रह रहे कारपेंटर परवेज मेहनत मजदूरी करके गुजारा करते हैं। हिंदुस्तान की नागरिकता नहीं होने से उनके पास न आधार कार्ड है और न ही राशन कार्ड। इस कारण उन्हें कोई भी सरकारी सुविधा नहीं मिलती है।
पत्नी ने छोड़ा साथ, मिलीं धमकियां
परवेज के मुताबिक भारतीय नागरिकता नहीं मिलने से उनका साथ पत्नी नसरीन उर्फ बेबी ने भी साथ छोड़ दिया। नसरीन बेटे-बेटियों के साथ अलग मकान में रहती हैं। परवेज अपनी मां और छोटी बहन के साथ अलग रहते हैं। परवेज ने बताया कि नागरिकता न होने की वजह से उन्हें कई बार धमकियां भी मिलीं। पुलिस भी उन्हें संगीन मामले में फंसाने की कोशिश कर चुकी है।
नागरिकता लो या पाकिस्तान जाओ
परवेज ने बताया कि उन्हें केंद्र सरकार की ओर से नोटिस भेजा गया है। इसमें भारतीय नागरिकता लेने को ऑनलाइन आवेदन करने को कहा गया है। नागरिकता न लेने पर पाकिस्तान जाने को लिखा है। खुफिया विभाग के एक अधिकारी ने भी नोटिस देने की पुष्टि की है। परवीन ने भारतीय नागरिकता हासिल करने को एक बार फिर ऑनलाइन आवेदन किया है। परवेज और नसरीन भी आवेदन करने को हैं। सितारा बेगम की ऐसी हालत नहीं कि वे कहीं आ जा सकें।