बरेली। सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने पर आशा बहुओं को प्रोत्साहन स्वरूप सरकार से 600 रुपये मिलते हैं, लेकिन यदि कोई आशा निजी अस्पताल मरीज ले जाती है तो उपचार का जितना बिल बनता है उसका 30 फीसदी कमीशन उसे मिल जाता है। इसका खुलासा एक आशा ने नाम न छापने की शर्त पर किया। नोडल अधिकारी डॉ. गौतम और महिला चिकित्सालय की सीएमएस भी स्वीकार करतीं हैं कि आशा बहुएं कमीशन के लालच में मरीजों को निजी अस्पताल भेज रही हैं, लेकिन अब तक इस काकस को तोड़ने के समुचित प्रयास शुरू नहीं किए जा सके हैं।
आशा बहुओं के पास ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं की पूरी जानकारी होती है। आशा बहुओं को यह भी जानकारी रहती है कि डिलीवरी की संभावित तिथि क्या है। यह कार्य आशा बहुएं सेहत महकमे की गाइड लाइन के तहत ही करती हैं। इसके एवज में नियत मानदेय के अलावा आशा बहुओं को प्रोत्साहन धनराशि भी स्वास्थ्य विभाग से मिलती है। नोडल अधिकारी डॉ. रंजन गौतम के मुताबिक गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण निकटवर्ती सीएचसी, पीएचसी अथवा जिला महिला अस्पताल में कराने पर आशा बहुओं को 300 रुपये प्रोत्साहन राशि मिलती है। इसके बाद जब वह सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिला को ले जाकर प्रसव करवा देती हैं तो फिर उन्हें 300 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इस प्रकार एक प्रसव पर इन आशा बहुओं को दो किश्तों में छह सौ रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है। आशा बहुएं शुरू में सरकारी अस्पताल में गर्भवती महिला का पंजीकरण करा कर 300 रुपये प्रोत्साहन राशि प्राप्त कर लेती हैं, इसके बाद जब प्रसव का समय आता है तो गर्भवती महिला को सरकार की 108 और 102 एंबुलेंस से सीएचसी अथवा जिला महिला अस्पताल ले जाती हैं। सूत्र बताते हैं कि वहां पहुंचने पर आशा बहुएं निजी अस्पतालों से कमीशन की मोटी रकम मिलने की आस में गर्भवती महिला के परिवार के लोगों को सरकारी अस्पताल में लापरवाही बरते जाने की बात कहते हुए निजी अस्पताल में अपनी जान पहचान का हवाला देते हुए वहां जाने का दबाव बनाती हैं। सरकारी अस्पताल से छुट्टी कराने के बाद आशा बहुएं अपनी सेटिंग वाले नर्सिंग होम में गर्भवती महिला को भर्ती करा देती हैं। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अलका शर्मा ने भी सीएमओ को भेजे पत्र में इस बात की ओर इशारा किया है।