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पुल पूरा होने में अभी डेढ़ साल तो फिर एप्रोच रोड का निर्माण क्यों!

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बरेली। चौबारी में रामगंगा का पुल बना नहीं तो अभी एप्रोच रोड क्यों बनाई जा रही थी? सेतु निगम के इंजीनियरों का कहना है कि पुल का काम पूरा होने में अभी एक से डेढ़ साल का वक्त लगेगा। एप्रोच रोड बन भी जाती है तो इसका कोई प्रयोग नहीं होगा, बल्कि इसके बरबाद होने से सरकारी रकम को चूना लगेगा। इस मामले को लेकर पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता ने भी प्रांतीय खंड के इंजीनियरों से जवाब मांगा है। अवैध खनन कर मिट्टी को रोड का पटान करने में खपाने पर पीडब्ल्यूडी के अधिकारी पहले से ही फंसे हैं।
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पीडब्ल्यूडी का प्रांतीय खंड रामगंगा चौबारी में निर्माणाधीन नए पुल की एप्रोच सड़क का निर्माण करा रहा है। पुल की दोनों साइड में करीब साढ़े चार सौ मीटर लंबी सड़क का निर्माण लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से हो रहा है। सड़क बनाने में करीब 20 लाख रुपये मिट्टी के पटान का खर्च भी जुड़ा है। इसके निर्माण में अब यह गड़बड़ी सामने आई है कि मिट्टी खरीदकर उसका पटान करने के बजाय रामगंगा के किनारे अवैध खनन कर इसकी आपूर्ति हो रही है, जबकि मिट्टी के खर्च का बंदरबांट करने की तैयारी है। खनन अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव के पास भी ये शिकायत पहुंची थी कि मिट्टी का अवैध खनन बड़े पैमाने पर हो रहा है। जांच में यह गड़बड़ी भी सामने आई कि पीडब्ल्यूडी ने सड़क के पटान के लिए प्रशासन से मिट्टी के खनन की अनुमति भी नहीं ली है। इस पुल को बनाने को लेकर इंजीनियरों ने यह लापरवाही भी दिखाई है कि इस रोड का फिलहाल कोई इस्तेमाल नहीं है।
रामगंगा पर 670.88 मीटर लंबे पुल का निर्माण जून 2016 में 46.73 करोड़ रुपये से स्वीकृत हुआ था, लेकिन बजट की कमी से यह काम अभी 40 प्रतिशत ही हो सका है। इसे पूरा होने में कम से कम एक से डेढ़ साल का वक्त लगना है। ऐसे में एप्रोच रोड का निर्माण कई सवाल खड़े कर रहा है।
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रामगंगा की एप्रोच रोड को लेकर सारी जानकारी प्रांतीय खंड के अधिकारियों से मांगी जा रही है। इसके बाद ही इसे लेकर कोई फैसला किया जाएगा। लापरवाही बरती गई है तो कार्रवाई होगी।
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- राकेश राजवंशी, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी
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