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बदले मन के मोदी कबूल हैं..

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बरेली। आखिरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अल्पसंख्यकों के लिए भी अपने दिल के दरवाजे खोल दिए। एनडीए का नेता चुने जाने के मौके पर अपने भाषण में उन्होंने अपने सांसदों को अल्पसंख्यकों का विश्वास जीतने हिदायत दी तो मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने देश में एक बड़े सकारात्मक बदलाव का संकेत करार दिया। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों के मन का डर खत्म हुआ तो देश के विकास में उनका योगदान भी शामिल होगा और देश दुगनी रफ्तार से विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा।
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अल्पसंख्यकों का विश्वास जीतने का मोदी जी का बयान लोकतंत्र के लिए एक अच्छी पहल है। इससे अल्पसंख्यकों में सरकार के प्रति एक नया विश्वास जागेगा। पहले जो स्थिति थी, उससे समाज उबरेगा। यह बात सार्थक होती है तो अल्पसंख्यक और विशेष रूप से मुसलमानों को भी चाहिए कि मोदी जी को खुले मन से सहयोग दें। यह विश्वास है कि अब ऐसा ही बेहतर माहौल होगा। इस पहल के लिए मोदी जी को शुभकामनाएं हैं। - डॉ. एसयू चिश्ती, चिकित्सक एवं सामाजिक कार्यकर्ता

यह सही है कि अल्पसंख्यकों और खास तौर से मुसलमानों को लंबे समय तक बहुत बरगलाया और डराया गया। बहरहाल अब नरेंद्र मोदी ने अल्पसंख्यकों के लिए जो बयान दिया है उससे हमें भरोसा है कि उनका नारा ‘सबका साथ सबका विकास और अब सबका विश्वास’ सार्थक होगा। पार्टी सांसदों और नेताओं के व्यवहार से मुस्लिमों में एक नया विश्वास पैदा होगा और देश की तरक्की में उनकी भागीदारी भी दिखेगी। यह बेहतरीन पहल होगी। - एम हसीन हाशमी, उद्यमी एवं समाज सेवी
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अल्पसंख्यकों के दिल में विश्वास पैदा करने का जो बयान नरेंद्र मोदी ने दिया है वह स्वागत योग्य है। इस नजरिए से देश भी तरक्की करेगा और इसमें मुस्लिम भी देश की तरक्की में खुलकर सहयोग कर पाएगा। साथ ही उसमें बेहतर करने का जज्बा पैदा होगा। मोदी जी की इस सार्थक पहल के साथ यह उम्मीद भी करते हैं कि अब मुस्लिमों के हैरेसमेंट पर भी अंकुश लगेगा और देश में एक खुशगवार माहौल दिखाई देगा। - डा. मोहम्मद अली अंसारी, चिकित्सक

2014 में जब मोदी सरकार बनी थी तब बहुत उम्मीद थी। लगा था कि बड़ा बदलाव आएगा। इस पांच सालों में भाजपा के कुछ नेता मुस्लिमों के खिलाफ बयान देते रहे, उस पर मोदी जी की खामोशी ने बहुत मायूस किया, उम्मीदें टूट गईं। अब उन्होंने अल्पसंख्यकों पर जो उदारता दिखाई है जो बेहद खुशी की बात है। उम्मीद है कि वह मुसलमानों का विश्वास जीत पाएंगे और भारत की अनेकता में एकता के संस्कृति के सूत्र में बांध कर देश को आगे ले जाएंगे। - डॉ. उजमा कमर, मनोवैज्ञानिक चिकित्सक
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